BMC चुनाव 2026: मुंबई की राजनीति में ‘परिवार पहले’ की छाया

पॉलिटिक्सBMC चुनाव 2026: मुंबई की राजनीति में ‘परिवार पहले’ की छाया

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पोलिटिकल डेस्क – मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव इस बार एक नए मुद्दे को लेकर चर्चा में हैं। 15 जनवरी को होने वाले BMC चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही साफ हो गया है कि इस बार ‘परिवार पहले’ राजनीति का असर काफी ज्यादा देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक, कम से कम 43 नेताओं ने अपने परिवार के सदस्यों को चुनावी टिकट दिलवाए हैं, जिससे वंशवाद और टिकट बंटवारे को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस चुनाव में कई बड़े दलों के नेताओं ने अपने बच्चों, पत्नियों, भाइयों-बहनों और रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाया है। नेताओं के प्रभाव और पारंपरिक वोटबैंक के दम पर परिवार के लोगों को टिकट मिलने के कई मामले सामने आए हैं।

किन नेताओं ने परिवार को टिकट दिलाया

बीजेपी विधायक राहुल नार्वेकर के परिवार से तीन लोगों को टिकट मिला।

मकरंद नार्वेकर (भाई) – वार्ड 226

हार्षिता नार्वेकर (भाभी) – वार्ड 227

डॉ. गौरवी शिवालकर (कजिन) – वार्ड 227

कांग्रेस विधायक असलम शेख ने भी परिवार के तीन सदस्यों को टिकट दिलाया।

हैदर शेख (बेटा) – वार्ड 34

क़मर जहान सिद्दीकी (बहन) – वार्ड 33

सैफ़ अहमद ख़ान (दामाद) – वार्ड 62

पूर्व एनसीपी विधायक नवाब मलिक भी तीन पारिवारिक टिकट दिलाने वालों में शामिल हैं।

अन्य प्रमुख उदाहरण

सांसद रविंद्र वाइकार की बेटी दीप्ति वाइकार वार्ड 73 से चुनाव लड़ रही हैं।

विधायक दिलीप लांडे की पत्नी शैला लांडे को वार्ड 163 से टिकट मिला।

विधायक अशोक पाटिल के बेटे रुपेश पाटिल वार्ड 113 से उम्मीदवार हैं।

शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता सदा सरवणकर के बेटे समाधान (वार्ड 194) और बेटी प्रिया (वार्ड 191) चुनाव मैदान में हैं।

पूर्व सांसद किरिट सोमैया के बेटे नील सोमैया वार्ड 107 से निर्विरोध जीत भी चुके हैं।

बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर के भाई प्रकाश दरेकर को वार्ड 3 से टिकट मिला।

कांग्रेस में भी कई नेताओं के परिवार को मौका दिया गया है, जिनमें आरीफ नसीम खान, चंद्रकांत हंडोरे, संजय दिना पाटील, सुनील प्रभु और मनोज जमसुतकर जैसे नाम शामिल हैं।

बीजेपी में अंदरूनी विरोधाभास

बीजेपी खुद को वंशवाद विरोधी पार्टी बताती रही है, लेकिन इस बार उसने भी कई मामलों में परिवार को टिकट दिया। हालांकि कुछ नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने से पार्टी ने इनकार भी किया, जिससे पार्टी के अंदर दोहरा रुख साफ नजर आता है।

कुल मिलाकर, इस बार BMC चुनावों में विकास, प्रशासन और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ परिवारवाद भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है। अब देखना होगा कि मुंबई की जनता इस ‘परिवार पहले’ राजनीति पर क्या फैसला सुनाती है।

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