- ब्लैक फंगस और एस्परजिलोसिस से एक साथ संक्रमित हैं छह मरीज
- एम्स ऋषिकेश में भर्ती मरीजों के लक्षण बने चिंता का कारण
ऋषिकेश। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस म्यूकोरमाइकोसिस की काली छाया उत्तराखंड पर पड़ने लगी। इसके बाद एस्परजिलोसिस लोगों को भयाक्रांत करने लगा है। लेकिन असली चिंता अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती छह मरीजों में ब्लैक फंगस म्यूकोरमाइकोसिस और एस्परजिलोसिस का मिश्रित संक्रमण मिलने से बढ़ गयी है। दो खतरनाक बीमारियों का मिश्रण मरीजों में मिलने से स्वास्थ विभाग में हड़कंप मच गया है।
उत्तराखंड में कोविड संक्रमितों पर ब्लैक फंगस म्यूकोरमाइकोसिस और एस्परजिलोसिस ने एक साथ मिलकर हमला बोला है। ऋषिकेश।एम्स के निदेशक पद्मश्री रविकांत के अनुसारएम्स में भर्ती छह कोविड संक्रमितों में ब्लैक फंगस और एस्परजिलोसिस का मिश्रित संक्रमण मिला है। एम्स में भर्ती 11 मरीजों में एस्परजिलोसिस के संक्रमण की भी पुष्टि हुई है। एम्स में अब तक ब्लैक फंगस के 182 केस मिले हैं। एम्स में अब तक ब्लैक फंगस के रिकाॅर्ड 33 मरीजों की मौत हो चुकी है।
चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस और एस्परजिलोसिस दोनों ही फंगल संक्रमण है। इसलिये दोनों संक्रमण से प्रभावित मरीजों के उपचार में ड्रग आॅफ चाॅइस एम्फोटेरिसिन बी और लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन व एंटीफंगल दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
ब्लैक फंगस और एस्परजिलोसिस का यह कांबिनेशन मरीजों के लिये बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में लोगों खासकर कोविड के मरीजों को खास सावधानी बरतनी चाहिये। दोनों इंफेक्शनों का कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकों से परामर्श लें। उपचार में देरी के साथ खतरा बढ़ सकता है।

