अयोध्या और बद्रीनाथ में मिली हार के बाद बात अब जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव में वैष्णो देवी सीट को लेकर हो रही है और लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या भाजपा इस सीट को बचा पायेगी या फिर उसका अयोध्या और बद्रीनाथ जैसा हाल होगा। दरअसल ये सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि दुसरे चरण में शामिल इस ऐतिहासिक महत्त्व की सीट पर 80 प्रतिशत तक मतदान हुआ है और यही वजह है कि लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं. ये सीट परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है और इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए पीएम मोदी प्रचार के लिए खुद कटरा पहुंचे थे और दो किलोमीटर लम्बा रोड शो भी किया था. अयोध्या और बद्रीनाथ के बाद वो वैष्णो देवी सीट को किसी भी कीमत पर हारना नहीं चाहते।
भाजपा उत्तर प्रदेश की फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट हार गई थी फिर उपचुनाव में उत्तराखंड की बदरीनाथ की विधानसभा सीट भी नहीं जीत सकी. धार्मिक महत्त्व की इन दो सीटों पर भाजपा की हार को लेकर विपक्ष ने बीजेपी पर जमकर घेरा था. अब ऐसे में माता वैष्णो देवी सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल तो बन ही गई है, यही वजह है कि भाजपा ने चुनाव प्रचार में यहां किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ी. श्री माता वैष्णो देवी विधानसभा सीट 2022 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आयी है जो रियासी और उधमपुर विधानसभा क्षेत्रों से अब अलग हो गई है.
प्रधानमंत्री मोदी की अपनी कोशिशों के बावजूद भाजपा की यहां जीत आसान नहीं दिख रही है, उसके उम्मीदवार बलदेव राज शर्मा जो पूर्व में रियासी से विधायक रह चुके हैं, को कई तरह चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उनके सामने कांग्रेस से भूपेंद्र सिंह समेत कुल सात उम्मीदवार हैं. बीजेपी ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार बदला है. रोहित दुबे को पहले इस सीट पर उम्मीदवार बनाया गया था, बाद में यहाँ से बलदेव शर्मा को टिकट दे दिया गया जिसकी वजह से रोहित दुबे के समर्थक नाराज हो गए और सड़कों पर उतर आये, ये नाराज़गी भाजपा को भारी पड़ सकती है. अयोध्या और बद्रीनाथ कई और ऐसी सीटें जहाँ धर्म स्थल हैं, भाजपा की हार के बाद लोग कहने लगे कि भगवान् भी भाजपा से नाराज़ चल रहे हैं और अपना आशीर्वाद दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों को दे रहे हैं ऐसा में ये देखना दिलचस्प होगा कि वैष्णो देवी का आशीर्वाद किसी मिलेगा।
