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भाजपा के राम या रावण: पार्टी के गले की हड्डी बने अरुण गोविल

आर्टिकल/इंटरव्यूभाजपा के राम या रावण: पार्टी के गले की हड्डी बने अरुण...

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पारुल सिंघल

आम लोकसभा चुनाव 2024 में राम नाम को कैश कर रही भाजपा के लिए रामायण के राम गले की हड्डी बन गए हैं। मेरठ हापुड़ लोक सभा सीट से भाजपा ने इस बार अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल को टिकट दिया था। भाजपा की मंशा थी कि राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल में जनता प्रभु श्री राम की छवि देखेगी और इस सीट पर जीतना बीजेपी के लिए बहुत सरल हो जाएगा। श्री राम को मैदान में उतरा देख जनता उन्हें हाथों हाथ लेगी। भाजपा का यह मास्टर स्ट्रोक लेकिन उन पर भारी पड़ गई है। बीते दिनों मेरठ हापुड़ लोकसभा पर हुए दूसरे चरण के चुनाव के दौरान अरुण गोविल की वजह से भाजपा की बहुत किरकिरी हुई। स्थिति यह बनी की बीते दो चुनावों में जिस सीट से भाजपा बंपर जीत दर्ज करवा रही थी। वहीं चुनाव प्रतिशत भी अन्य सालों के मुकाबले काफी बढ़ गया था। उस पर न केवल इस बार चुनाव प्रतिशत गिरा, बल्कि भाजपा के लिए यह सीट निकालना भी काफी चुनौती भरा दिखाई दे रहा है।

स्टारडम से नहीं निकले बाहर

मेरठ सीट से जमीनी नेता तीन बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर इस बार अरुण गोविल को भाजपा द्वारा टिकट दिया गया था। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद से ही राम के नाम पर भाजपा चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है। इसी के मद्देनजर रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को मेरठ से टिकट मिला था लेकिन वह अपने स्टारडम से बाहर नहीं निकल पाए। मेरठ में चुनाव प्रचार के दौरान उनका स्टारडम पूरी तरह से हावी रहा। विपक्षियों ने भी इसे खूब हवा दी। जिसके चलते भाजपा की भी खूब आलोचना हुई।

विवादित बयानों से हुई छवि खराब

अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल ने मीडिया के सामने भी लगातार काफी विवादित बयान दिए। उनके ये विवादित बयान लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने यह तक कहा कि जिस क्षेत्र से वह चुनाव लड़ रहे हैं, वहां की समस्याओं और मुद्दों की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उनका काम सिर्फ यहां से चुनाव जीतना है। चुनाव जीतने के बाद ही वह यहां पर मुद्दों को जानने का प्रयास करेंगे। जिसे लेकर भी भाजपा की छवि को काफी नुकसान हुआ। उनके यह बयान नेशनल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुए। चुनाव प्रचार की शुरुआती दौर में मीडिया द्वारा चुनाव जीतने के बाद उनके मेरठ में रहने पर सवाल पूछे थे। जिस पर उनका यह तो समय बताएगा वाला बयान भी काफी चर्चा में रहा। विपक्षी दलों ने इसे भी हाथों-हाथ लिया। उनके इस बयान के बाद भाजपा की भी बहुत किरकिरी हुई। इस बयानों के बाद भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल पर बाहरी का टैग मजबूती से चस्पा हो गया।

खुद को समझते रहे राम
मेरठ में अपने चुनाव प्रचार के दौरान अरुण गोविल लगातार खुद को श्री राम ही समझते रहे। अपने कई जनसंपर्क कार्यक्रमों में उन्होंने लोगों से वोट डालने की अपील के बजाय चेतावनी देते हुए देखा गया। उन्हें मेरठ की जनता से यह तक कह डाला की राम खुद चुनाव लड़ने आए हैं। उनके चुनावी पोस्टर्स पर वह लगातार राम की वेशभूषा में नजर आए। उनके रोड शो में रामायण में सीता बनी दीपिका और लक्ष्मण बने सुनील लहरी ने भी उन्हें राम का दर्जा देते हुए लोगों से वोट डालने के लिए अपील की थी। उनके सभी जनसंपर्क कार्यक्रम राममय रहे। खुद को राम समझना और लोगों के बीच उनकी समस्याओं को ना समझने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। मतदान वाले दिन रील के राम के इस बर्ताव के चलते ही भाजपा के काफी वोटर्स ने वोट डालने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

सोशल मीडिया पर पोस्ट, विपक्ष ने लिया आड़े हाथ
अरुण गोविल को प्रत्याशी बनाने का सबसे बड़ा नुकसान वोटिंग के ठीक अगले दिन भाजपा को झेलना पड़ा। 26 अप्रैल को मतदान के बाद अगले दिन 27 अप्रैल को भाजपा के कार्यकर्ताओं समेत कई लोग अरुण गोविल से मिलने उनके मेरठ आवास पर मिलने पहुंचे थे। किंतु जैसे ही यह पता चला कि अरुण गोविल सुबह तड़के ही मेरठ से मुंबई रवाना हो गए। यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई। सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों ने इसे जमकर उछाला। मेरठ की जनता भी खुद को ठगा हुआ सा महसूस करने लगी । इसके बाद अरुण गोविल की सोशल प्लेटफॉर्म एक्स हैंडल (पूर्व में ट्वीटर) पर डाली गई पोस्ट पर भी भाजपा की काफी किरकिरी हुई। रविवार को सबसे पहले उनकी एक इमोशनल पोस्ट वायरल हुई। जिसे कुछ घंटे बाद उन्होंने डिलीट तो कर दिया लेकिन तब तक यह पोस्ट फिर भाजपा के गले की फांस बन गई थी। अरुण गोविल द्वारा कई ऐसी पोस्ट की गई जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और जिन्होंने बीजेपी की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।

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