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बीजेपी का मिशन सेंधमार

BJP's mission burglar

अमित बिश्नोई
केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है. 2024 में किस तरह एकबार फिर मोदी सरकार बरकरार रहे इसे लेकर आज दिल्ली में भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक से जो सबसे महत्वपूर्ण बात निकलकर आयी है वो ये है कि भाजपा 2024 का चुनाव जीतने के लिए विपक्ष के नेताओं का ही सहारा लेगी। राजनीतिक भाषा में बोलें भाजपा मिशन सेंधमारी की शुरुआत करने जा रही है और इसके लिए बाकायदा आठ सबसे विश्वासपात्र लोगों को ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। इस मिशन सेंधमारी के तहत ये टीम विपक्ष के उन नेताओं को भाजपा में शामिल करने की कोशिश करेगी जिनके विचार कहीं न कहीं भाजपा की विचारधारा से मेल खाते हों या फिर वो जो दूसरे दलों में अपने को उपेक्षित और असहज महसूस कर रहे हों.

भाजपा इसकी तैयारी काफी समय से कर रही है और उसने ऐसे बहुत से नेताओं की लिस्ट भी बनाई है जिन्हें भाजपा में लाया जा सकता है। भाजपा का मकसद इंडिया गठबंधन के विशवास को तोड़ना है, इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेताओं को तोड़कर उन्हें कमज़ोर करना भाजपा की रणनीति है। आज भाजपा ने मिशन सेंधमारी के लिए जिन आठ लोगों की कमेटी का गठन किया है उनमें राहुल गाँधी और परिवार के धुर विरोधी और कभी कांग्रेस में रहे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम प्रमुख है. इसके अलावा पार्टी महासचिवों में से सुनील बंसल, विनोद तावड़े और तरुण चुग को चुना गया है वहीँ केंद्रीय मंत्रियों में मनसुख मंडविया, अश्वनी वैष्णव और भूपेंद्र यादव को ये ज़िम्मेदारी दी गयी है.

इस टीम का ख़ास लक्ष्य उत्तर प्रदेश को लेकर है जहाँ उसे सपा, रालोद, बसपा और कांग्रेस में हलचल मचानी है। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम् राज्य है और एकमुश्त सीटें हासिल करने की सबसे फेवरिट जगह भी, लेकिन इंडिया गठबंधन बनने और OBC का मुद्दा उछलने के बाद भाजपा यूपी को लेकर थोड़ा चिंतित है। हालाँकि पिछले विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में मिली जीत के बाद उसने राहुल गाँधी के OBC की काट केलिए मुख्यमंत्री का चयन हो या कैबिनेट का गठन सब जगह इस सामाजिक समीकरण का पूरा ख्याल रखा है और इसलिए उसने छत्तीसगढ़ में आदिवासी तो मध्य प्रदेश में OBC मुख्यमंत्री बनाया है। चुनाव जीतने वाले तीनों राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कैबिनेट में भी OBC समुदाय को काफी महत्त्व दिया गया है लेकिन भाजपा को इतने पर ही संतोष नहीं है। वो इंडिया गठबंधन के लिए कोई लूपहोल छोड़ना नहीं चाहती और न ही उसे इकठ्ठा होकर सेटल होने देना चाहती है और इसलिए उसने मिशन सेंधमारी शुरू करने का फैसला किया है.

हर चुनाव से पहले इस बार भी आने वाले दिनों में निश्चित ही पार्टी छोड़ने और पकड़ने का सिलसिला शुरू होगा, ऐसे में भाजपा द्वारा बनाई गयी इस कमेटी की भूमिका बहुत अहम् होगी। हालाँकि भाजपा में कोई भी बड़ा फैसला सिर्फ टॉप के दो तीन लोग ही लेते हैं फिर भी कहा जा रहा है कि इस कमिटी को इस बात का पूरा अधिकार दिया गया है कि वो किसे पार्टी में शामिल करें, ऐसे मामले में इसी कमेटी का फैसला अंतिम होगा। अब देखना है कि मिशन सेंधमारी के लिए बनाई गयी कमेटी विपक्षी पार्टियों में कितनी सेंधमारी करती है और कितने ऐसे नेताओं को तोड़कर भाजपा में लाने में कामयाब होती है जो इंडिया गठबंधन की एकजुटता को धक्का पहुंचा सके. वैसे भाजपा को इस काम में महारत हासिल है लेकिन विपक्षी पार्टियां भी भाजपा के हथकंडों को अच्छी तरह जान चुकी है, उसके पास भी ऐसी कमेटी के गठन की खबर पहुँच चुकी होगी और वो भी कील कांटे से दुरुस्त होने की कोशिश में लग गयी होगी। बकौल अखिलेश यादव भाजपा बड़ी खतरनाक पार्टी है और ये कुछ भी कर सकती है। उत्तर प्रदेश में अपने नेताओं को सबसे ज़्यादा संभालने की ज़िम्मेदारी उसी की है, उसे ही यूपी में सेंधमारी का सबसे ज़्यादा खतरा है, क्योंकि कांग्रेस, बसपा और रालोद में ज़्यादा कुछ बचा नहीं है.

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