Site icon Buziness Bytes Hindi

न दंगे का जिक्र न सांप्रदायिकता की बातें,पहले चरण का हश्र देख भाजपा ने बदली चुनावी रणनीति


न दंगे का जिक्र न सांप्रदायिकता की बातें,पहले चरण का हश्र देख भाजपा ने बदली चुनावी रणनीति

मेरठ। भाजपा की चुनावी रणनीति – पहले चरण के मतदान में भाजपा का सांप्रदायिकतावाद और हिंदुत्व का अस्त्र फेल होने के बाद भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में अब बदलाव किया है। पहले चरण के चुनाव और उसके मतदान के बाद अब भाजपा कहीं भी हिंदुत्व और सांप्रदायिकता का मुददा नहीं उठा रही है। भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना मजबूरी बन गई है। इत्रनगरी कन्नौज में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के भाषण में भाजपा के दोनों मोहक शब्द बिल्कुल गायब दिखे। प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिकता और हिंदुत्व का कही भी जिक्र नहीं किया। इस बार उन्होंने परिवारवाद के अलावा एकजुटता और कानून व्यवस्था के अलावा भाजपा सरकार में किए गए कल्याणकारी कार्यक्रम और महिला सुरक्षा का अपने भाषणों में अधिकांश समय जिक्र किया। हालांकि उन्होंने इस दौरान एक दो बार सांप्रदायिकता और दंगावाद का जिक्र किया लेकिन यह जिक्र उन्होंने विपक्षी पार्टी सपा के लिए किया। प्रधानमंत्री ने पहले चरण के मतदान का भी जिक्र किया। जिसमें उन्होंने कहा कि पहले चरण में भाजपा के पक्ष में बन रही हवा को देखकर विपक्षी दलों की हालत खराब हो गई है। इंत्र नगरी कन्नौज से उन्होंने परिवारवाद और जातिवाद का भी आरोप विपक्ष पर लगाया।

Read also: असम भाजपा सांसद ने दो भाइयों की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की

पहले चरण में भाजपा ने करवाए थे जातिवाद कार्यक्रम :

पहले चरण के चुनावी में भाजपा ने जातिवाद को भी खूब बढ़ चढ़कर साधने की कोशिश की। इसी कड़ी में भाजपा ने जहां दलित सम्मेलन,ब्राहमण सम्मेलन और त्यागी समाज का कार्यक्रम करवाए वहीं दूसरी ओर वैश्यों के भी कई कार्यक्रम करवाए गए। जिसमें स्थानीय प्रत्याशियों को बुलाया गया और उनके पक्ष में विभिन्न जातियों के मतदाताओं के बीच हवा बनाने की कोशिश की गई। हालांकि भाजपा का यह अस्त्र भी पहले चरण के मतदान के दौरान नहीं चला। इसी के चलते भाजपा ने अब पहले चरण के चुनाव में उम्मीद के विपरीत मिली सफलता को दृष्टिगत रखते हुए अपनी चुनावी रणनीति पूरी तरह से बदल दी है। उसी बदली चुनाव रणनीति के तहत ही कन्नौज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में काफी बदलाव देखा गया। जातिवाद, धर्म, सांप्रदायिकतावाद को भाजपा ने अब आने वाले छह चुनावी दौर में तिलांजलि दे दी है। भाजपा का बीच चुनाव में यह बदलाव क्या रंग लाएगा। यह तेा आने वाली 10 मार्च को पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि मतदाताओं का रूख देख भाजपा दिग्गजों की नींद उड़ी हुई है।

Exit mobile version