Gujarat Chunavi Dangal: गुजरात मे होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पक्ष विपक्ष आपस मे भिड़े हुए हैं और जनता को लुभाने के लिए आय दिन अपनी रणनीति में परिवर्तन कर रहे हैं। वही अगर हम बात सत्ताधारी दल भाजपा की करे तो गुजरात मे इसके लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है कांग्रेस। कांग्रेस जो की पिछले 27 साल से गुजरात मे अपनी वापसी के लिए प्रयास कर रही है। वही भाजपा पिछली बार की कांग्रेस की बढ़त से कुछ सहमी हुई है और उसकी कमजोरी का फायदा उठाकर उसकी मजबूत रीढ़ को तोड़ना चाहती है।
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अगर हम वर्ष 2017 मे हुए विधानसभा चुनाव की बात करे तो गुजरात मे 182 सदस्यों की विधानसभा के लिए भाजपा ने 99 सींटें जीती थी। वही कांग्रेस ने अपने मजबूत वोट बैंक और उम्दा रणनीति के बलबूते पर गुजरात मे अपनी अच्छी पकड़ बनाई थी और यहाँ 77 सींटें जीतकर भाजपा के सामने बड़े विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। यह कांग्रेस का डेढ़ दशक से बेहतरीन प्रदर्शन था और कांग्रेस के सामने भाजपा को अपनी जीत कायम रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
लेकिन इस बार भाजपा पहले से सजग हों गई है और उसने कांग्रेस की कमजोरी का फायदा उठाना आरम्भ कर दिया है। कांग्रेस के कई नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है वही पाटीदार समाज के बड़े नेता कहे जाने वाले हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को विरोधी दल बताकर भाजपा का दामन थाम लिया है। हार्दिक एक ऐसे नेता थे जिन्होंने भाजपा के विरोध में रहते हुए उसकी कड़ी आलोचना की ओर भाजपा के बड़े नेताओं को अनेको उपाधियां दी। उन्होंने अमित शाह को जनरल डायर तक कह डाला।
लेकिन भाजपा में 2022 के अंत मे होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए हार्दिक की सारे कटाक्षों को भुलाकर उन्हें भाजपा परिवार का हिस्सा बनाया। राजनीति विशेषज्ञयों का कहना है कि भाजपा जानती है कि कांग्रेस छोड़कर आए हार्दिक पटेल के पास अब पटेल समाज का भरपूर समर्थन नहीं है। ओर न भाजपा को हार्दिक से कोई खास लाभ होगा।
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लेकिन हार्दिक कांग्रेस के लिए मजबूत साबित हो सकते थे और कांग्रेस को तोड़ने के लिए भाजपा ने हार्दिक को अपने खेमे में करने की बड़ी चाल चली है। इतना ही नहीं भाजपा की ओर जाने के बाद से हार्दिक लगातार हिंदुत्व के मुद्दे और भाजपा की नीतियों के समर्थन में दिखाई देते हैं। हार्दिक का यह व्यवहार स्पष्ट दिखा रहा है कि वह कांग्रेस को तोड़ने और गुजरात मे भाजपा को बेहतर विकल्प बनाने के काम मे जुट गए है और कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी को भाजपा का मजबूत हथियार बनाना चाह रहे हैं।
