Gujarat Chunavi Dangal:- देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले निर्धारित चुनाव प्रक्रिया के मुताबिक भाजपा की ओर से आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। वैसे तो द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा के संथाल जाति की है। लेकिन इनको राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर भाजपा ने बड़ा दाव खेला है।
जो की भाजपा को गुजरात मे होने वाले विधानसभा चुनाव में काफी मदद दे सकता है। क्योंकि गुजरात वैसे तो भाजपा का गढ़ है। लेकिन यहां के आदिवासी वोट बैंक को गेम चेंजर वोट बैंक कहा जाता है और यह समाज भाजपा से रूठा हुआ है। गुजरात के आदिवासी समाज को लुभाने की कोशिश प्रत्येक राजनीति दल कर रहा है लेकिन इस समाज पर कांग्रेस की उम्दा पकड़ बनी हुई है।
वही भाजपा ने इस बार आदिवासी समाज से सम्बद्ध द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस के इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। अगर हम आदिवासी आरक्षित सीटों की बात करे तो गुजरात मे कुल 27 सींटें आदिवासी समाज के हाँथ में है। वर्ष 2017 में हुए चुनाव में इन 27 सींटो मे से 15 सींटें कांग्रेस ने जीती और 9 सींटो पर भाजपा अपनी जीत दर्ज कर पाई। लेकिन द्रौपदी मुर्मू को भाजपा ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित कर गुजरात मे अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।
द्रौपदी मुर्मू का चुनावी कनेक्शन:-
भाजपा को द्रौपदी मुर्मू से न सिर्फ राजनीति में फायदा होगा बल्कि यह गुजरात से लेकर राजस्थान तक की राजनीति में भाजपा के लिए संजीवनी बूटी साबित होंगी और इनके माध्यम से भाजपा हर राज्य में आदिवासी समाज पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। वही हम इस साल के अंत मे होने गुजरात विधानसभा चुनाव की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू के भाजपा के लिए काफी उपयोगी साबित होंगी और आदिवासी समाज को भाजपा से जोड़ने का काम करेगी। वही अगर यह राष्ट्रपति बन जाती है तो भाजपा की आदिवासी समाज पर पकड़ मजबूत होगी और विपक्ष को बड़ा झटका लग सकता है।
