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लीटर के बाद टी शर्ट: भाजपा आईटी सेल के बुरे दिन

भाजपा आईटी सेल के लगता है इन दिनों अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं तभी वह कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को को निशाना बनाकर जो भी तीर छोड़ रही है वो वापस उसी की तरह आ जाता है और आई टी सेल को मैदान छोड़कर भागना पड़ रहा है. कहीं न कहीं राहुल को घेरने के चक्कर में इन पीएम मोदी और अमित शाह और भाजपा के दूसरे बड़े नेता घिर जाते हैं. विरोधियों के खिलाफ भाजपा की सोच कहाँ से कहाँ तक पहुँच गयी है, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी अब विरोधी नेताओं के जूते और कपड़े देखने लगी है, उनके ब्रांड का पता लगा रही है, उनकी कीमत की जांच कर रही है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सही कहा कि अभी ये undergarments तक पहुंचेंगे। जयराम की बात में दम भी है क्योंकि राजनीती का स्तर ही इतना गिरता जा रहा है कि अगर ऐसा हो जाय तो कोई हैरानी नहीं होगी।

बहरहाल बात भाजपा आईटी सेल की हो रही थी. आप सबको मालूम ही होगा कि अपने वजूद को बरकरार रखने और अपनी मिटती हुई साख को जनता के बीच जाकर ढूंढने के लिए राहुल गाँधी के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कांग्रेस पार्टी की “भारत जोड़ो यात्रा” शुरू हो चुकी है. इस यात्रा को क्या रिस्पांस मिल रहा है इसपर बाद में लिखेंगे, मगर इतना तो तय है कि राहुल के नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकलने वाली इस यात्रा से भाजपा बेचैन ज़रूर है और वो शायद इसलिए कि भारत में राजनीतिक यात्राओं का एक इतिहास रहा है और इतिहास यात्राओं द्वारा परिवर्तन का रहा है, राजनीतिक चेतना को जगाने का रहा है. तो इस यात्रा से बेचैन भाजपा इसका काउंटर करने में जुट गया. सोशल मीडिया पर यात्रा के विरोध में पोस्टों की झड़ी लगा दी मगर इसी बीच आईटी सेल की निगाह यात्रा के के पहले दिन राहुल के पहने जूतों पर गयी और उसके ब्रांड और मंहगी कीमत को लेकर राहुल को घेरने की कोशिश की, इसके बाद यात्रा के दूसरे दिन राहुल ने जो टी शर्त पहनी उसकी मंहगी कीमत जो सिर्फ 41 हज़ार रूपये है को लेकर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से निशाना साधा और देश से कहा कि “भारत देखो”

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जूते और टी शर्ट का मुद्दा उछालते समय आई टी सेल शायद यह भूल गया कि उनके सर्वोच्च नेता को कांग्रेस और दूसरे लोग परिधान मंत्री भी कहते हैं. वो यह भूल गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी नमो नमो वाला सूट भी पहना था जिसकी कीमत 10 लाख बताई गयी थी और जो बाद में करोड़ों का नीलाम हुआ था. वो यह भूल गया कि सूर्य ग्रहण देखने के लिए मोदी जी ने कभी एक चश्मा लगाया था जिसकी कीमत डेढ़ लाख बताई गयी थी. अब आप किसी की खिड़की के शीशे पर पत्थर उछालोगे वो भी तब जब आपका पूरा घर ही शीशे का बना है तो पत्थर तो आपकी तरफ भी आएंगे। और ऐसा ही हुआ, भाजपा आई टी सेल के जवाब में कांग्रेस का आईटी सेल तुरंत एक्टिव हुआ, उसके बड़े बड़े नेता भी एक्टिव हुए और सोशल मीडिया पर लोगों को सूट बूट और चश्मे की याद दिलाने लगे. राहुल गाँधी तो पहले ही सूट बूट की सरकार कहते रहे हैं. 

अभी कुछ ही दिन पहले भाजपा के आई टी सेल ने राहुल के लीटर में आटा वाले वीडियो की कटिंग क्लिप जारी कर मोदी जी, अमित शाह और दूसरे कई मंत्रियों और नेताओं की फ़ज़ीहत करा चुकी है. इस वीडियो को भक्तगण और मीडिया भी बड़ी तेज़ी से लेकर उड़ा था मगर बात फिर वही आ जाती है कि “जॉनी जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते”. राहुल की एक क्लिप के जवाब में कांग्रेस के आई टी सेल ने दर्जनों ऐसे वीडियो क्लिप जारी कर दीं जिसमें मोदी जी और अमित शाह ज़बान फिसलने का शिकार हुए थे, राहुल ने तो अपनी गलती को अगले सेकण्ड ही सुधार लिया था मगर मोदी जी और अमित शाह को तो पता भी नहीं चला कि क्या बोल गए. “बेटी पढ़ाव की जगह बेटी पटाव” और “12वीं पास का दसवीं में एडमिशन”. गिरिराज सिंह की ज़बान फिसलने का तो मामला बहुत ही गंभीर था, कांग्रेस को घेरने के चक्कर में वो प्रधानमंत्री को आतंकियों का समर्थक और सेना को गाली देना वाला बोल गए थे. हालाँकि राहुल के लीटर की तरह यह भी ज़बान का फिसलना ही था.

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दरअसल यह सब तब होता है जब आप सियासत को कीचड़ उछालने का एक जरिया मान लेते हैं, आप अपने विरोधी को घेरने और उसे जनता की नज़रों में गिराने में इतना डूब जाते हैं कि आपको पता नहीं चलता कि दरअसल खुद को गली दे रहे हैं, खुद को घेर रहे हैं, खुद पर हमले कर रहे हैं. विरोधियों को घेरना बेशक राजनीति का एक अहम् हिस्सा है लेकिन इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि कहीं आप भी तो वही सब नहीं कर चुके हैं या कर रहे हैं जिसके लिए विरोधी पर हमले कर रहे हैं. अंग्रेजी का एक शब्द है boomerang, मतलब लकड़ी का एक ऐसा टुकड़ा जिसे जब फेंका जाता है तो वो वापस फेंकने वाले की तरफ आता है. उम्मीद है बात समझ गए होंगे।

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