Maharashtra Crisis Live: उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व पर भारी भाजपा का हिंदुत्व, शिव सेना के भविष्य पर तलवार

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शिव सेना सरकार के भविष्य पर अब तलवार लटकी है। सवाल उठ रहे हैं कि राजनीतिक संकट का राष्ट्रीय विपक्ष पर असर क्या होगा। आम चुनाव में अब दो साल से कम का समय रह गया है। ऐसे में सभी दल इस सियासी संकट में जनता के सामने संकटमोचक बनकर उभरना चाह रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र में विपक्ष पहले से मरा हुआ है। उनका 2024 का आम चुनाव जीतने का कोई मतलब  नहीं है। अगर अगले महीने ही लोकसभा चुनाव हो जाए तो महाराष्ट्र में भाजपा बड़े बहुमत के साथ सत्ता में अपनी उपस्थिति दाखिल करेंगी। कांग्रेस महाराष्ट्र में और भी नीचे जाएगी। विपक्ष तो कमज़ोर हो रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि राजनीति में दो साल का समय बहुत लंबा है। यहां एक महीने का पता नहीं होता क्या हो जाए। कुछ लोग भाजपा को 350 सीटें मिलने का दावा करते हैं और कांग्रेस को 30 या 20 तक जाने का दावा कर रहे हैं। लोगों का यह भी कहना है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना महाराष्ट्र में एक इतिहास बनने जा रही है। यानी महाराष्ट्र में अब शिवसेना के हिदुत्व का चैप्टर बंद होने वाला है और भाजपा का हिदुत्व शिवसेना पर भारी पड़ रहा है। शिव सेना के उद्धव ठाकरे ने भाजपा हिंदुत्व के मुक़ाबले महाराष्ट्र में वैकल्पिक हिंदुत्व देने की कोशिश की।

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उद्धव ठाकरे  के इस हिंदुत्व से एनसीपी,कांग्रेस को उम्मीद बंधी कि वो इस वैकल्पिक हिंदुत्व मॉडल को देश के दूसरे हिस्सों में लेकर जा सकेंगे। लेकिन भाजपा के हिंदुत्व की तरह उद्धव ठाकरे हिंदुत्व महाराष्ट्र में फिलहाल नहीं चल सका। यहीें कारण है कि शिवसेना सरकार संकट से उसके हिदुत्व की कोशिशों को धक्का लगा है। महाराष्ट्र में कभी दिवंगत बाल ठाकरे ने अपने हिदुत्व नीत से किसी से भी कोई समझौता नहीं किया था। लेकिन बाल ठाकरे के परिवार के लोग ही अब हिदुत्व को ताक पर रखकर एनसीपी और कांग्रेस से समझौता कर रहे हैं जो भाजपा के लिए महाराष्ट्र में संजीवनी बन रहा है। उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में कहा था कि शिव सेना का हिंदुत्व सबको साथ में लेकर चलने वाला है। महाराष्ट्र में हिंदुत्व राजनीति के इतिहास अलग ही रहा है। बाल ठाकरे ने ही वहां पर हिंदुत्व राजनीति की शुरुआत की थी। लेकिन अब भाजपा बाल ठाकरे की नीति पर बढ़ रही है और हिंदुत्व की अकेली आवाज बन रही है। भाजपा को लगता है कि अगर महाराष्ट्र में आगे बढ़ना है तो हिंदुत्व की अकेली आवाज़ बनना ही बेहतर होगा।  इसलिए वो चाहते थे कि शिव सेना के छोटे भाई का रोल अदा करे। यहीं कारण है कि आज उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व पर भाजपा का हिंदुत्व भारी पड़ रहा है।

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