OBC और दलित वोटबैंक को फिर साधने में जुटी भाजपा

उत्तराखंडOBC और दलित वोटबैंक को फिर साधने में जुटी भाजपा

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OBC और दलित वोटबैंक को फिर साधने में जुटी भाजपा

नई दिल्ली: पिछले चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के कामयाब फॉर्मूले को भाजपा एक बार फिर आज़माने जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग में खाली पड़े पदों को भरने का काम शुरू कर दिया है. सीएम योगी ने जहाँ पिछड़ा वर्ग आयोग की कमान गैर-यादव ओबीसी को दी है वहीँ एससी एसटी कमीशन की बागडोर जाटव समुदाय की सौंपी है.

उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के गठन के बाद गुरुवार को उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग का गठन किया. इन दोनों ही आयागों के जरिए बीजेपी अपने वोटबैंक को मजबूत करती नजर आ रही है. यूपी के पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष जसवंत सैनी को बनाया गया है जबकि उपाध्यक्ष हीरा ठाकुर और प्रभुनाथ चौहान को बनाया गया है. इसके अलावा जगदीश पांचाल, हरवीर पाल, चंद्रपाल खड़गवंशी, विजेंद्र भाटी, राकेश कुशवाहा, जगदीश साहू, रामरतन प्रजापति, बलराम मौर्य, रघुनंदन चौरसिया, शिवमंगल बियार, देवेंद्र यादव, डॉ त्रिपुणायक विश्वकर्मा, राम जियावन मौर्य, राधेश्याम नामदेव, धर्मराज निषाद, अरुण पाल, ममता राजपूत लोधी, घनश्याम लोधी, सपना कश्यप, रविंद्र राजौरा, शिवपूजन राजभर, गिरीश वर्मा, रमेश वर्मा निषाद, जवाहर पटेल और नरेंद्र पटेल को आयोग का सदस्य बनाया गया है.

मुख्यमंत्री योगी ने ओबीसी आयोग की कमान सैनी समाज को सौंपकर पश्चिम यूपी में एक बड़े ओबीसी वोटबैंक को साधने की कोशिश की है. इस आयोग में गैर-यादव ओबीसी को खास तवज्जो दी गई है, जिनमें पाल, लोध, निषाद और चौरसिया और गुर्जर सहित अति पिछड़ी जातीय के लोग शामिल हैं. 25 सदस्य कमेटी में महज एक यादव को शामिल किया गया है.

वहीं बुधवार को यूपी में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग में अध्यक्ष व उपाध्यक्षों के अलावा 12 सदस्यों को नामित किया गया है. यूपी एससी-एसटी आयोग का अध्यक्ष डॉक्टर रामबाबू हरित को बनाया गया है जबकि उपाध्यक्ष के पद पर मिथिलेश कुमार और रामनरेश पासवान को नियुक्त किया गया है. इसके अलावा गीता प्रधान, ओपी नायक, रमेश तूफानी सदस्य. राम सिंह वाल्मीकि, कमलेश पासी, तीजाराम सदस्य शेषनाथ आचार्य, अनीता सिद्धार्थ, राम आसरे सदस्य श्याम अहेरिया, मनोज सोनकर, श्रवण गोंड सदस्य, अमरेश चंद्र, किशनलाल, केके राज आयोग के सदस्य बनाए गए हैं.

उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरणों पर नजर डालें तो सवर्ण जातियां 18 फीसदी हैं, जिसमें ब्राह्मण 10 फीसदी हैं जबकि पिछड़े वर्ग की संख्या 39 फीसदी है, जिसमें यादव 12 फीसद, कुर्मी, सैथवार आठ फीसदी, जाट पांच फीसदी, मल्लाह चार फीसदी, विश्वकर्मा दो फीसदी और अन्य पिछड़ी जातियों की तादाद 7 फीसदी है. इसके अलावा प्रदेश में अनुसूचित जाति 22 फीसदी हैं और मुस्लिम आबादी 20 फीसदी के करीब है.

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