राजस्थान के तीन बड़े नगर निगमों—जयपुर, जोधपुर और कोटा—के मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। शुक्रवार को हुए मतदान में जयपुर में सुनील कोठारी, जोधपुर में प्रसन्न चंद मेहता और कोटा में अनुसुईया गोस्वामी महापौर चुने गए।
तीनों नगर निगमों के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा उन अतिरिक्त वोटों की रही, जो उम्मीदवारों को उनके दलों के घोषित पार्षद संख्या से ज्यादा या कम मिले। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।
कोटा में अनुसुईया गोस्वामी को 65 वोट
कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 30 वोट से हराया।
अनुसुईया गोस्वामी को कुल 65 वोट मिले, जबकि सुनीता सुमन को 35 वोट मिले।
नगर निगम चुनाव में भाजपा के 57 पार्षद जीते थे। भाजपा को दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के बाद 59 मतों का समर्थन होने का दावा था, लेकिन मेयर चुनाव में उसके उम्मीदवार को 65 वोट मिले।
वहीं कांग्रेस के 39 पार्षद होने के बावजूद उसकी प्रत्याशी को 35 मत मिले। इस अंतर के बाद राजनीतिक हलकों में क्रॉस-वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि गुप्त मतदान के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि अतिरिक्त छह वोट भाजपा उम्मीदवार को किन पार्षदों से मिले।
जयपुर में सुनील कोठारी बने मेयर
जयपुर नगर निगम में भाजपा के सुनील कोठारी ने मेयर पद का चुनाव जीत लिया।
कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट मिले। एक वोट NOTA के खाते में गया। इस तरह कोठारी ने 29 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा ने 78 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के पास 57 पार्षद और 15 निर्दलीय व अन्य पार्षद थे।
नतीजे में भाजपा उम्मीदवार को अपने 78 पार्षदों से 11 वोट अधिक मिले। कांग्रेस उम्मीदवार को भी पार्टी के 57 पार्षदों से तीन अधिक वोट मिले, जबकि एक वोट NOTA को गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन मेयर चुनाव में निर्णायक रहा।
जोधपुर में प्रसन्न चंद मेहता की जीत
जोधपुर नगर निगम में भाजपा के प्रसन्न चंद मेहता ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सोलंकी को छह वोट से हराकर मेयर पद पर कब्जा किया।
मेहता को 53 वोट, जबकि सोलंकी को 47 वोट मिले।
जोधपुर नगर निगम की 100 सीटों में भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती थीं। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक RLP पार्षद निर्वाचित हुआ था।
मेयर चुनाव से पहले भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा करते हुए अपने पास 52 वोट होने की बात कही थी।
अंतिम मतदान में भाजपा उम्मीदवार को 53 वोट मिले। इससे यह साफ है कि घोषित 52 समर्थकों के अलावा एक और वोट मेहता के पक्ष में गया। हालांकि गुप्त मतदान के कारण यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि यह वोट RLP पार्षद का था या किसी अन्य खेमे से आया।
तीनों बड़े शहरों में BJP के मेयर
जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों के साथ भाजपा ने राजस्थान के तीन प्रमुख नगर निगमों में मेयर पद अपने नाम कर लिए हैं।
इससे पहले हुए शहरी निकाय चुनावों में भी भाजपा ने राज्य में बढ़त बनाई थी। राजस्थान के 301 घोषित निकायों में भाजपा ने 197 में बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस 94 निकायों में बोर्ड बनाने में सफल रही।
जयपुर में भाजपा पहले से स्पष्ट बहुमत में थी, जबकि जोधपुर में निर्दलीय पार्षद सत्ता का संतुलन तय करने की स्थिति में थे। कोटा में भाजपा के पास बहुमत था, लेकिन मेयर मतदान में उम्मीदवार को मिले अतिरिक्त वोटों ने राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया।
तीनों शहरों के नतीजों ने यह भी दिखाया कि नगर निगम के वार्ड चुनाव में मिली सीटों का गणित मेयर चुनाव में हमेशा उसी रूप में नहीं रहता और निर्दलीय तथा अन्य दलों के पार्षद अंतिम परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
