Site icon Buziness Bytes Hindi

Gujarat Chunavi Dangal: गुजरात में फिर मोदी मैजिक के सहारे भाजपा

गुजरात में होने विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टियां मोर्चा खोले हुए हैं. दोनों ही पार्टियां 27 साल से सत्ता में बैठी भाजपा को हटाने के लिए गुजरात में लगातार तरह तरह की घोषणाएं कर रही हैं, एक तरह से कह सकते हैं यह दोनों विपक्षी पार्टियां गुजरात चुनाव को लेकर अपने पत्ते खोल चुकी हैं लेकिन सत्ताधारी भाजपा ने अभी तक यह नहीं ज़ाहिर होने दिया कि वह अपनी सत्ता कार्यकाल को और आगे बढ़ाने के लिए क्या करने जा रही है. 

वैसे गुजरात चुनाव की बात करें तो मुकाबला एकबार फिर मोदी मैजिक और विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूरे देश में भाजपा हर राज्य में चुनाव मोदी जी के नाम पर ही लड़ती है, फिर गुजरात की तो बात ही अलग, वह उनका गृह राज्य है, यहाँ से उनकी अस्मिता सीधे तौर पर जुडी रहती है. हर चुनाव में मोदी जी गुजरात जाकर लोगों को गुजरती अस्मिता की याद दिलाते हैं. यह याद दिलाते हैं कि भाजपा की हार मोदी की हार है और मोदी की हार का मतलब गुजरातियों की हार. इसबार भी पूरी उम्मीद है कि विपक्ष के सारे पत्ते खुलने के बाद वो अपना पुराना तुरुप का पत्ता फिर चलेंगे और गुजरात चुनाव को अपने मान-सम्मान से जोड़ेंगे।

Read also: BJP ने अब तक खरीदे 277 MLA, 6300 करोड़ रुपए किए खर्च: केजरीवाल का दावा

अब देखना यह होगा कि विपक्षी पार्टियां मोदी जी के इस तुरुप की चाल की काट किस तरह करेंगे। शायद यही वजह है कि गुजरात में रेवड़ियों के बरसने की बातें हो रही हैं, क्योंकि पिछले कुछ चुनावों को अगर देखा जाय तो मुफ्त सौगातों ने सत्ता दिलाने में बहुत मदद की है. यही देखते हुए गुजरात में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मुफ्त योजनाओं की रेवड़ी बांटने का ज़ोरशोर से ढिंढोरा पीट रही हैं. आप और कांग्रेस की इन घोषणाओं से सत्ताधारी भाजपा बहुत बेचैन है. जिस मुफ्त योजनाओं के हथियार का इस्तेमाल उसने लोकसभा और कई राज्यसभा के चुनावों को जीतने के लिए किया, वह अब उसका विरोध कर रही है, इतना ही नहीं पार्टी समर्थक वरिष्ठ वकील के ज़रिये इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा दिया। 

गुजरात में पिछले यानि 2017 के चुनावों में भाजपा के हाथ से सत्ता फिसलते फिसलते बची थी और अब वह कटाई नहीं चाहती कि 2022 में ऐसा कुछ हो. पिछले चुनावों में ऐन मौके पर मोदी जी ने अस्मिता वाला मैजिक चला कर भाजपा को बचा लिया था, अब देखना है कि क्या भाजपा उसी मोदी मैजिक के सहारे बैठी हुई है या फिर राज्य सरकार ने कुछ काम भी किया जिसे वह आने वाले चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी.

Exit mobile version