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चुनावों में क्या ‘बिस्कुट’ के साथ होगी हक़ की लड़ाई? शार्ट फिल्म ‘बिस्कुट’ की कहानी कुछ ऐसी ही है


चुनावों में क्या ‘बिस्कुट’ के साथ होगी हक़ की लड़ाई? शार्ट फिल्म ‘बिस्कुट’ की कहानी कुछ ऐसी ही है

Zulfia Hasan

चुनाव का मौसम आ चुका है। सबकी नजरें इन दिनों उत्तर प्रदेश के चुनावों पर टिकीं हैं जहां का माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में रंग चुका है। वैसे तो हर बार चुनाव के मनभावन कई मुद्दे होते हैं लेकिन इस बार की बात करें तो चुनाव का मुद्दा विकास और समाज कल्याण की जगह जात पात और धर्म पर जोर देता हुआ नजर आ रहा है। हर चुनावों की तरह इन चुनावों में भी राजनीतिक पार्टियों में इस बात की जद्दोजहद में लगी हुई हैं कि कौन ज़्यादा से ज़्यादा दबे और पिछड़े तबके का वोट को अपनी ओर खींच पाती है। यानि एक बार फिर इन शोषित वोटर्स को लुभाकर, उनका इस्तेमाल करके, उनके वोटों को पाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

ऐसे में इन्हीं मुद्दों को लेकर फिल्माई गई शार्ट फिल्म “बिस्कुट” लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। क्योंकि इस फिल्म का नायक ‘भूरा’ भी पिछड़े वर्ग से तआल्लुक रखता है और साधारण से ‘बिस्कुट’ के जरिए से अपने मालिक जोकि सवर्ण वर्ग से संबंध रखता है, एक नेता भी है उससे बदला लेने के लिए रहस्मय और बहुत ही रोमांचकारी योजना बनाता है| बिस्कुट एक कड़वी लेकिन प्रेरणाप्रद कहानी है जो आज के राजनीतिक गलियारों में फैल चुके भ्रष्टाचार को बयां करती है। कहानी ये भी बताती है की कितने रहस्यमयी तरीकों से अपना लोकतंत्र चलता है और कैसे आम आदमी का वोट ही बदले और बदलाव का सबसे ताकतवर हथियार है।

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ये शॉर्टफिल्म गोरिल्ला शॉर्ट्स के यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ हो चुकी है और उनके पहले से चल रही ऑफबीट सीजन 1 सीरीज का हिस्सा है गोरिल्ला शॉर्ट्स की दूसरी फिल्मे जैसे स्टेशन मास्टर फूल कुमार और चढ्ढी पहले ही लोकप्रिय हो चुकी हैं।

‘बिस्कुट’ फिल्म का स्क्रीनप्ले अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में रहने वाले अमिष श्रीवास्तव ने लिखा है और फिल्म का निर्देशन भी अमिष ने ही किया है। अमिष ने अमेरिकन यूनिवर्सिटी यूसीएलए एक्सटेंशन से फिल्म स्टडीज के लिए मशहूर स्क्रीनप्ले की पढाई की है और न्यूयॉर्क में फिल्म डायरेक्शन की तालीम ली है। इस फिल्म के निर्माता संदीप शांत डेट्रॉइट की टीएसएस फिल्म्स के सीईओ हैं और उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में ही पले-बढ़े हैं। यही वजह थी कि उन्होंने फिल्म को किसी सेट पर ना फिल्मा कर अपने ही गांव में शूट करने का फैसला किया था। जिसकी शूटिंग के लिए  मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री से पूरा शूटिंग क्रू और मुख्य ऐक्टर्स बलरामपुर में लगभग दस दिनों के लिए रुके थे। फिल्म की पूरी शूटिंग सात दिनों में पूरी हो गई थी।

बलरामपुर के एक रिमोट गांव सूरत सिंह डीह में फिल्माई गई इस फिल्म में गांव के लोगों ने भी फिल्म में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि गांव के लोगों ने इससे पहले फिल्म का कैमरा नहीं देखा था। फिल्म में आम लोगों का होना रियलिटी की फील देता है।

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मुख्य कलाकारों में नेटफ्लिक्स सिरीज़ सेक्रेड गेम्स से चर्चा में आये चितरंजन त्रिपाठी ने गांव के दबंग सरपंच ‘नवरतन सिंह ‘की भूमिका निभाई है ! नायक दलित ‘भूरा’ की भूमिका निभाई है अमरजीत सिंह ने जो कि वेबसिरीज़ मिर्ज़ापुर और पाताल लोक में ज़ोरदार भूमिका निभा चुके हैं।

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