बिलकीस और भाजपा

आर्टिकल/इंटरव्यूबिलकीस और भाजपा

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अमित बिश्नोई
कल सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया जो बिलकीस बानो के चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कान लाया, बिलकिस ने फैसले के बाद कहा कि मेरे लिए तो नया साल आज है. सुप्रीम कोर्ट का बहुत बहुत शुक्रिया जिसने न्याय मिलने की मेरी उम्मीदों को ज़िंदा रखा. बिलकीस बानो दो दशकों से ज़्यादा बार बार न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, कई बार तो वो बिलकुल मायूस भी हो गयी, इन्साफ की उम्मीद लगभग छोड़ दी लेकिन लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया और इन्साफ की लड़ाई लड़ने में उनकी मदद की और आखिरकार उन्हें कामयाबी मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी रेपिस्टों और हत्यारों को एकबार फिर जेल भेजने का आदेश दिया जो गुजरात और केंद्र सरकार की भाजपा सरकार की मदद से समय से पहले ही जेल से बाहर आ गए थे. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भाजपा और केंद्र व गुजरात सरकार के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है. लोगों को अभी भी शक है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बिलकीस के अपराधियों को दो हफ्ते में क्या वाकई जेल में वापस भेजा जायेगा। चुनावी वर्ष है और सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला मोदी सरकार के लिए एक कड़ा इम्तेहान है। बता दें कि बिलकीस बानो का गुजरात दंगों के दौरान रेप हुआ था, साथ ही उनकी माँ का भी उनके सामने लात्कार हुआ था, 21 साल की बिलकीस उस समय चार महीने के गर्भ से थी. बलात्कार के बाद उनके सामने ही उनके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गयी थी. 17 लोगों का ये परिवार एक खेत में छुपा हुआ था, तीन सदस्य जीवित बचे थे, बाकियों का आजतक कोई पता नहीं चल सका.

बिलकीस के ये अपराधी वापस जेल जायेंगे इसपर कांग्रेस ने तो पूरा शक जता ही दिया है. कल कांग्रेस की महिला मोर्चे की नयी राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लाम्बा ने साफ़ तौर पर कहा था कि उन्हें शक है कि बिलकीस के इन दोषियों को वापस जेल भेजा जायेगा। अलका लाम्बा ने कहा कि उन्हें शक है कि भाजपा सत्ता और संख्या के दम पर एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं पलटेगी। अलका लाम्बा की बात में वज़न है, केंद्र सरकार ऐसा कर चुकी है, इलेक्शन कमिश्नर्स की नियुक्ति पर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कानून बनाकर पलट चुकी है. वो ऐसा फिर कर सकती है, करेगी या नहीं इसपर अभी कहना मुश्किल है लेकिन शक तो जायज़ है।

अजब संयोग है. जब बिलकिस के इन अपराधियों को समय से छोड़ने के फैसले पर केंद्र की सहमति से गुजरात सरकार ने मुहर लगाईं थी उस समय गुजरात विधानसभा के चुनाव होने वाले थे, अब एकबार फिर चुनावी माहौल है, इस बार उससे भी बड़ा चुनाव, यानि लोकसभा का चुनाव, यानि पीएम मोदी को तीसरी बार सत्ता में लाने का चुनाव। ऐसे में इस बार बिलकिस और भाजपा में एकबार फिर टकराव सामने आ गया है. पिछली बार जब ये सभी समय से पहले जेल से बाहर आये थे तो गुजरात चुनाव में काफी सक्रीय हुए थे, भाजपा के चुनावी मंचों पर इनका स्वागत किया जाता था, इन्हें अच्छे चरित्र वाला बताया जाता था. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा के लिए थोड़ा मुश्किल सवाल पैदा हो गया है। क्या भाजपा एकबार फिर इनके बचाव में सामने आएगी, क्या गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चैलेन्ज करेगी।

समय सिर्फ दो हफ्ते का है, देश में अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां चल रही हैं, देश विदेश से अयोध्या में लोगों का जमावड़ा होने वाला है. ये मौका भाजपा और पीएम मोदी के लिए बड़ी प्रतिष्ठा वाला है, ऐसे में बिलकीस मामले पर भाजपा क्या फैसला करेगी? बात प्रतिष्ठा की भी है, बिलकीस के सभी अपराधियों को जेल से समय से पहले बाहर लाने में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की सहमति शामिल थी तो क्या उनका फैसला गलत था. गलत फैसले तो भाजपा करती नहीं है, ऐसा उसका कहना है. तो फिर शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब उसका क्या रुख होगा, खासकर तब जब सारा देश राम मय होने वाला है. समय सिर्फ दो सप्ताह का है. या तो इस फैसले के आगे सिर झुकाया जा सकता है या फिर इसमें अड़ंगा लगाया जा सकता है. आगे कुंआ पीछे खाई वाली हालत है. वैसे तो बिलकीस के केस से भाजपा या इसकी सरकारों को कभी कोई फर्क नहीं पड़ा, तब भी नहीं जब बिलकीस के केस को सुनवाई योग्य नहीं समझ गया था और तब भी नहीं जब सभी अपराधियों के समय से बाहर निकलने पर पूरे देश में लोगों ने हंगामा किया था लेकिन इस समय मौका थोड़ा अलग है. राम को नया घर मिल रहा है, देश में हर तरफ जश्न का माहौल है ऐसे में क्या भाजपा बिलकीस के इन अपराधियों का समर्थन कर अयोध्या के जश्न को फीका करना चाहेगी? याद रखिये कि प्रधानमंत्री मोदी ने आज ही अपने एक्स सन्देश में कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के दिन माहौल खराब न हो.

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