- शासन ने अधिकारियों को दिये सख्त कार्रवाई करने के आदेश
- एसआईटी ने 80 अफसरों को विकास दुबे का सहयोगी बताया
लखनऊ,। बिकरू कांड में एसआईटी की जांच सामने आने के बाद शासन ने कारवाई की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। माफिया विकास दुबे का साथ देने वाले दोषी अधिकारियों की सूची इंटलीजेंस और एसटीएफ को भेजी जायेगी। इस कांड को लेकर यूपी सरकार पर भी सवालिया निशान उठे लगाने थे।
शासन ने सभी अधिकारियों को कड़े आदेश दिया हैं कि किसी भी सूरत में दागी अफसरों को बख्शा न जाये। एसआईटी ने रिपोर्ट में अब तक 80 अफसरों को विकास दुबे का सहयोगी बताया है।
एसआईटी की रिपोर्ट में कानपुर के पूर्व एसएसपी अनंत देव तिवारी के पुलिस एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के साथ उनके संबंध की जांच कराने की सिफारिश की गई है। दागी अफसरों की चल-अचल सम्पतियों का पता लगाने के लिए खुफिया विभाग को अलर्ट कर दिया गया हैं। विकास के अलावा और कौन-कौन अपराधी रहे हैं, जिनकी अफसरों ने मदद की, इसकी जानकारी जुटाने लिए शासन ने एसटीएफ को इंटलीजेंस टीम का सहयोग देने के आदेश दिये हैं।

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने लिखा है कि एक सिपाही ने एसओ को विकास की धमकी के बारे में जानकारी दी लेकिन उसने ये बात दबा ली। इससे साजिश में शामिल होने की पुष्टि होती है। एसआइटी की जांच में विकास दुबे के घर पुलिस टीम के दबिश देने की सूचना पहले ही लीक कर दिए जाने से जुड़े कई तथ्य उजागर हुए हैं।
17 नवम्बर को होगी नाबालिग आरोपी की कोर्ट में सुनवाई
बिकरू कांड में फंसे नाबालिग आरोपी के वकील ने बताया कि नाबालिग की तरफ से एक प्रार्थनापत्र कोर्ट में दे दिया गया है। उन्होंने नाबालिग का पूरा मेडिकल चेकअप कराये जाने की मांग करते हुए उसकी जान को खतरा की बात कही है। इस प्रार्थनापत्र पर ७ नवम्बर को कानपुर कोर्ट में सुनवाई होनी है।
120 दिन बाद भी पुलिस के हाथ से दूर विकास दुबे का मोबाइल
बिकरू कांड बहुत से अनसुलझे रहस्यों से भरा हुआ है। अब एक नया पेंच सामने फंसा नजर आ रहा है। जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपी माफिया विकास दुबे का मोबाइल अभी तक तेजतर्रार पुलिस से काफी दूर है। फोन को पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ देवेन्द्र मिश्रा का भी एक फोन गायब है। इसी फोन से लगातार आडियो वायरल हो रहे हैं। सीओ का मोबाइल भी न मिलने से सवाल उठने लगे हंै। पुलिस के अनुसार विकास दुबे भागकर फरीदाबाद में रुका था। महाकाल मंदिर में गिरफ्तारी के दौरान और कानपुर लाते वक्त जब उसने भागने की कोशिश की तब कहीं पर भी कोई फोन बरामद नहीं किया गया। दुबे के पास फोन भी था, इसकी जानकारी भी पुलिस के पास नहीं है।
बिकरू कांड से पहले माफिया के पास फोन था इसके प्रमाण भी मिल चुके है। इसमें सीओ ने आरोप लगाया था कि पूर्व एसओ ने एक जुआ पकड़ने के मामले में पांच लाख रुपए पूर्व कप्तान को पहुंचा दिए जिसके कारण उसके खिलाफ र्कारवाई नहीं हुई। फोन से ही चैबेपुर थाने में सिपाही से उसकी बातचीत का आडियो वायरल हुआ था। इस मामले पर काम कर रही एसटीएफ टीम के अधिकारियों ने भी इस बात का दावा किया है कि घटना से पहले विकास के पास फोन थे। वही पुलिस के अफसर भी इस बात को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।

