Uttarpradesh News: पश्चिम यूपी के जिलों में मानसूनी बारिश कम होने का ये रहा सबसे बड़ा कारण, अब धान किसानों को करनी पड़ रही है सिंचाई

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पश्चिमी यूपी से इस बार मानसून रूठा रहा। मानसून रूठने के कारण इस बार पश्चिमी यूपी के 11 जिलों में 50 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई। जिसका असर यहां के धान किसानों पर पड़ रहा है। धान किसान अब सिंचाई कर धान की फसल को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे है। बता दें जून से अगस्त तक 50 प्रतिशत कम बारिश मानसून सीजन में हुई है। जबकि पूर्वांचल और देश के अन्य राज्यों में बारिश के चलते बाढ़ के हालात बन गए है। मेरठ में इस मानसूनी मौसम में औसत से 53 फीसद कम बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिक ने इसका कारण पेड़ों का कटान और पर्यावरण को मुख्य माना है। मेरठ सहित पश्चिमी उप्र के धान किसान ब सिंचाई कर फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे धान किसानों की चिंता बढ़ गई हैं।

मानसून ने जब जून के आखिरी दिनों में उप्र में दस्तक दी तो केरल सहित महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में झमाझम बारिश हुई। लेकिन  पश्चिमी  यूपी तक पहुंचते तक मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई। मौसम विभाग के मुताबिक मेरठ में सामान्य तौर पर 489ः4 मिमी बारिश होने का अनुमान था। लेकिन जून में मानसून आगमन के बाद से  अगस्त में अब तक मात्र 228ः1 मिमी बारिश ही हुई है। पश्चिमी उप्र के जिलों में मानसूनी बारिश की बात करें तो गाजियाबाद और अन्य जिलों में 70 फीसद कम बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उप्र में सबसे कम बारिश गाजियाबाद में हुई। गाजियाबाद में मानसूनी बारिश अब तक सामान्य तौर पर 342 मिमी दर्ज की गई है। दूसरे नंबर पर नोएडा में 75 फीसद बारिश कम हुई। जहां 340 मिमी के मुकाबले मात्र 85 मिमी ही बारिश रिकार्ड की गई। पश्चिमी उप्र में बारिश कम होने का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग और यहां पर अंधाधुंध पेड़ों का कटान भी माना जा रहा है। हाईवे व एक्सप्रेसवे बनाए जाने के नाम पर लाखों.पेड़ों को काट दिया गया। इसी तरह बारिश कम होती रही तो पश्चिमी उप्र को एक दिन सूखा क्षेत्र घोषित करना पड़ेगा। 

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मौसम वैज्ञानिकों की माने तो नकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल यानी आईओडी का विकसित होना भी मानसूनी बारिश नहीं होने का मुख्य कारण माना जा रहा है। पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री सतहों का तापमान पूर्वी हिंद महासागर की तुलना में ठंडा होता है। जिससे इस क्षेत्र में हवाएं बाधित हुई और ये ऑस्ट्रेलिया की ओर बहने लगी। 

जिला        कम हुई बारिश
बागपत        65 प्रतिशत
मेरठ        53 प्रतिशत
गाजियाबाद        76 प्रतिशत
हापुड़        23 प्रतिशत
शामली        58 प्रतिशत
मुजफ्फरनगर        41 प्रतिशत
सहारनपुर        51 प्रतिशत
नोएडा            75 प्रतिशत
बुलंदशहर        58 प्रतिशत
मुरादाबाद        59 प्रतिशत

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