नई दिल्ली। मूसेवाला हत्याकांड, सलमान रुश्दी हमला, शिंजो आबे मर्डर और अब रूस में पकड़े आत्मघाती हमलावर की घटना से सबक लेकर अब देश की सुरक्षा एजेंसियों ने वीआईपी सुरक्षा ट्रेनिंग में बदलाव किया है। पहली बार जिन महत्वपूर्ण लोगों की जान को खतरा है। उनकी सुरक्षा में तैनात कमांडो और बेसिक ट्रेनिंग कोर्स करने वाले सुरक्षाकर्मियों को हेलीबोर्न स्लिदरिंग ऑपरेशन की ट्रेनिंग देने की तैयारी की गई है। जिससे कि जरूरत पड़ने पर आपातकाल स्थिति में हेलीकॉप्टर का उपयोग कर हमलावर को पकड़ा जा सके या फिर जब वो भाग रहा हो तो उसका रास्ता रोका जा सकें। इस वीआईपी सुरक्षा मॉड्यूल को बनाने से पहले भारत और विश्व में इस साल महत्वपूर्ण शख्सियतों पर हमलों का आंकलन किया गया। जिसके बाद इसे बनाया। इस ट्रेनिंग मॉड्यूल की सबसे खास बात है कि वीआईपी सुरक्षा में तैनात कमांडो से साधारण सुरक्षाकर्मियों को इसकी ट्रेनिंग जाएगी। इसके अलावा वीआईपी के पास मौजूद क्विक रिएक्शन टीम को इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया है।
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हेलीबोर्न स्लिदरिंग नाम के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हेलीकॉप्टर को मौके पर बुलाया जाता है। इसमें वीआईपी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबल चढ़ते और फिर रस्सी के सहारे हमलावर की वार को नाकाम करने के लिए जमीन पर उतरते हैं। ऐसा पहली बार हुआ जब यह विशिष्ट ट्रेनिंग बेसिक ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनी। जिससे वीआईपी सुरक्षा में हर स्तर के सुरक्षा कर्मियों को आला दर्जे की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें हेलीकॉप्टर को 18 से 50 मीटर की ऊंचाई पर ले जाया जाता है। इसके बाद इस तरीके से सुरक्षाकर्मियों को जरूरत की जगह उतारा जाता है। जंगल में पेड़ और शहरी इलाकों में बिल्डिंग की इमारत ऊंची होती है। इसलिए ही इतनी ऊंचाई से इनको उतारा जाता है। वीआईपी सुरक्षा ट्रेनिंग मॉड्यूल में पुरुष के साथ महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।

