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बीएसपी के ब्राह्मण कार्ड को बड़ा झटका


बीएसपी के ब्राह्मण कार्ड को बड़ा झटका

अन्य जातियों के बड़े चेहरे पहले ही साथ छोड़ गए, अब ब्राह्मणों नेता भी जा रहे
जातीय समीकरण साध रही पार्टी का बिगड़ रहा गणित

ऊषा  सिंह

लखनऊबीएसपी ने इस चुनाव में सबसे पहले ब्राह्मण कार्ड खेला था लेकिन उसको बड़ा झटका लगा है। विधायक हरिशंकर तिवारी और उनका परिवार भी अब सपा में जाने की तैयारी में है। यही वजह है कि बीएसपी ने विनय शंकर तिवारी, भाई कुशल तिवारी और रिश्तेदार गणेश शंकर पांडेय को पार्टी से निकाल दिया है। ऐसे में जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर रही बीएसपी का गणित और  बिगड़ता ही जा  रहा है। अन्य जातियों के बड़े चेहरे पहले ही दूसरी पार्टियों का दामन थाम चुके हैं।

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ये है मुश्किल की वजह
विधायक विनय शंकर तिवारी, उनके भाई और पूर्व सांसद कुशल तिवारी, रिश्तेदार गणेश शंकर पांडेय का बीएसपी से जाना इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि पूर्वांचल में इस परिवार की ब्राह्मणों में खासी पैठ रही है। गणेश शंकर  पांडेय पिछली बीएसपी  सरकार में विधान परिषद के सभापति रहे। सूत्रों के अनुसार विनय शंकर तिवारी जल्द ही सपा ज्वाइन कर सकते हैं। कुछ दिन पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिल थे। उसके बाद ही बीएसपी ने उनको निष्कासित करने का निर्णय लिया है। बीएसपी की मुश्किल इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि इस चुनाव में ब्राह्मण कार्ड भी सबसे पहले बीएसपी ने खेला था। लगातार कई ब्राह्मण सम्मेलन किए। 

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कई बड़े ओबीसी नेता गए
ओबीसी चेहरों  की बात की जाए तो दो बड़े नेता राम अचल राजभर और लालजी वर्मा पहले सपा में शामिल हो चुके हैं। दोनों ही पार्टी में शुरुआती समय से जुड़े रहे। पिछली सरकारों में ये  दोनों मंत्री रहे और पार्टी के कई अहम पदों की जिम्मेदारी भी सम्भाली। इनको पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में मायावती  ने निकाल दिया। सूत्रों के अनुसार ये पिछले पंचायत चुनाव से सपा के सम्पर्क में थे, इसलिए  यह निर्णय लिया गया। पूर्व विधान सभा अध्यक्ष  सुखदेव राजभर का हाल ही में निधन हो गया लेकिन उससे पहले खुद उन्होंने पत्र लिखकर पार्टी से नाखुशी जताई थी अपने पुत्र को सपा के सुपुर्द करने की बात पत्र में लिखी थी। उनके पुत्र जल्द ही आधिकारिक तौर पर सपा ज्वाइन करेंगे। विधायक हाकिम लाल बिंद और सुषमा पटेल भी सपा ज्वाइन कर चुकी हैं। 

मुसलमान नेताओं का मोहभंग
मुसलमान नेताओं की बात हो तो हाल ही में लालजी वर्मा की जगह विधानमंडल दल के नेता बनाए गए शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली भी अपने इस पद के साथ ही विधायकी से इस्तीफा दे चुके हैं। वह दो बार आजमगढ़ की मुबारक पुर सीट से विधायक रह चुके हैं। वहां मुसलमानों में उनकी अच्छी पैठ रही है। इससे पहले असलम अली चौधरी, मुहम्मद मुज्तबा सिद्दीकी और मुहम्मद असलम राइनी सपा ज्वाइन कर चुके हैं। इनको भी पार्टी से निकाल दिया गया था। मुख्तार अंसारी को टिकट न देने का मायावती पहले ही ऐलान कर चुकी हैं। 

सवर्ण और एससी
ब्राह्मण से पहले अन्य सवर्ण और दलित भी दूसरी पार्टियों का दामन थाम चुके हैं। हरगोविंद भार्गव सपा ज्वाइन कर चुके हैं। वस सिधौली(सुरक्षित सीट) से विधायक रहे। वहीं क्षत्रिय नेता वंदना सिंह कुछ दिन पहले बीजेपी में शामिल हो गई थीं।

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