लैंसडाउन- उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले का लैंसडाउन अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्व विख्यात है. आज हम लैंसडाउन के पास ही स्थित उस मंदिर के बारे में आपको बताते हैं. जो न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. बल्कि अपने ट्रैक के लिए भी लोगों के बीच हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है. यहां हम बात कर रहे हैं प्रसिद्ध धाम भैरव गढ़ी की. भगवान शिव के 15 अवतारों में से एक काल भैरव का नाम भी आता है.
लैंसडाउन से करीब 15 किलोमीटर दूर राजखिल गांव की ऊंची चोटी पर यह देवस्थल मौजूद है. काल भैरव को गढ़वाल के रक्षक के रूप में भी जाना जाता है. भैरव गढ़ी (Bhairav Garhi) न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है अपितु यहां के प्राकृतिक और मनोहारी दृश्य आपको यहां बार बार आने के लिए विवश करेंगे.
मांडवे के आटे का चढ़ाया जाता है प्रसाद
उत्तराखंड के गढ़वाल को 52 गढ़ों का देश कहा जाता है. इन्हीं 52 गढ़ों में से एक है भैरव गढ़ी (Bhairav Garhi mandir) . जिसे गढ़वाल का द्वारपाल कहा जाता है. माना जाता है कि काल भैरव को काली चीजें पसंद है. यही वजह है कि भैरव गढ़ी में भैरव के लिए मंडवे के आटे का प्रसाद तैयार किया जाता है जिसे रोट प्रसाद कहते हैं. इसका वास्तविक नाम लंगूर गढ़ है दरअसल लांगुल पर्वत पर स्थित होने के कारण इसे लंगूर गढ़ कहा गया है. इतिहासकारों के अनुसार लंगूर गढ़ अपने साहस और वीरता के लिए जाना जाता था. बताया जाता है कि गोरखा की फौज ने लंगूर गढ़ को जीतने के लिए 2 साल तक घेराबंदी की. लेकिन सफल ना हो सके, जिसके पीछे भैरव गढ़ी के प्रताप को माना जाता है. यही कारण है कि भैरव गढ़ी को गढ़वाल का द्वारपाल माना गया है. यहां आने वाले श्रद्धालु काल भैरव से मनौती मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर चांदी का छत्र चढ़ाते हैं.
भैरव गढ़ी (Bhairav Garhi mandir) पहुंचने के लिए आपको पैदल ट्रैक का सफर तय करना पड़ता है. तकरीबन 40 मिनट का यह ट्रैक आपको थोड़ा थका भी देगा. लेकिन जब भैरव गढ़ी मंदिर प्रांगण में आप पहुंचते हैं. तो मंदिर के आसपास का नजारा देखकर आपकी थकान दूर हो जाती है. पहाड़ की चोटी पर स्थित इस मंदिर से न केवल आपको हिमालय के दर्शन होते हैं. बल्कि मंदिर के चारों तरफ दूर और बहुत गहरी घटिया आपको रोमांचित करती हैं.
