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मिसाइलें फटी तो बेरूत बन जायेगा कानपुर का बड़ा इलाका

कानपुर। यह खबर किसी के भी दिल को दहला सकती है कि कानपुर की एक बड़ी आबादी पिछले 16 साल से बारूद के ढेर पर बैठी हुई है। 7 घातक मिसाइलें उनके घर के पास रखी हुईं हैं जो कोई हादसा होने पर कानपुर का एक बड़ा हिस्सा तबाह कर सकती हैं। मगर सिस्टम की लापरवाही तो देखिये की इन मिसाइलों को जूही रेलवे यार्ड कंटेनर डिपो में रखे हुए 16 साल गुजर चुके हैं मगर किसी भी अधिकारी ने यह नहीं सोचा की उनकी यह लापरवाही कानपुरवासियोें की जान के लिये कितना बड़ा खतरा बन सकती है। 

गौरतलब है कि 4 अगस्त 2020 की शाम बेरूत में हुए जबरस्त धमाके में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। हादसे में छह हजार से अधिक लोग घायल और लगभग तीन लाख लोग बेघर हो गए थे। इस हादसे की वजह थी बेरूत बंदरगाह के पास एक इमारत में स्टोर करके रखा गया 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट जिसमें विस्फोट होने से बेरूत तबाह हो गया था। 

कानपुर के जूही रेलवे यार्ड के कंटेनर डिपों में 16 साल से यूएई से स्क्रैप में आयीं घातक मिसाइलें रखी हैं जो सरकारी तंत्र की लापरवाही का बड़ा नमूना है। दरअसल शिकोहाबाद की एक फर्म ने जनवरी 2005 में संयुक्त अरब अमीरात से मेटल स्क्रैप मंगवाया था। इस स्क्रैप में विस्फोटक होने की आशंका होने पर कंटेनरों की जाच कराई गयी तो 7 जीवित और 70 मिस फायर मिसाइलें कंटेनर में बंद होने का पता चला। इन मिसाइलों को निष्क्रिय करने से बम निरोधक दस्ते ने भी हाथ खड़े कर दिये। इसका एक कारण यह था कि बम निरोेधक दस्ता मिसाइलों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता। ऐसे में जरा सी भी चूक होने पर मिसाइलें फट सकती थीं और कानपुर की एक बड़ी आबादी इसकी चपेट में आकर जान गवां सकती थी। इसके बाद शुरू हुआ फाइलों में कार्रवाई का सिलसिला। टीमें बनाईं गयीं, मौका-मुआयना, जांचें भी की गयीं मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।

पिछले साल बेरूत में हुए धमाके के बाद यार्डों में रखे सामानों की जांच शुरू हुई तो कानपुर प्रशासन को इन जिंदा मिसाइलों की यादव आयी। इसके बाद तीन दिन पहले एडीएम सिटी ने डीएम को रिपोर्ट भेजी है। यह तय किया गया है कि इन मिसाइलों को महाराष्ट्र के वर्धा भेजा जायेेगा जहां इनको निष्क्रिय किया जा सकेगा। मगर सवाल यह बनता है कि लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिये तैनात अधिकारी आखिर लोगों की जान को पिछले 16 साल से दांव पर क्यों लगाये हुए थे। इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिरकार किसकी है। और सबसे बड़ी बात, आखिर हम कोई हादसा होने के बाद ही क्यों जागते हैं।

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