- रेसमेड इंडिया ने की #WakeUpToGoodSleep कैंपेन की शुरुआत
- डिजिटल कैंपेन में लोगों के साथ डाॅक्टरों को भी किया जायेगा जागरूक
हेल्थ डेस्क । अच्छी सेहत के लिए गहरी नींद सोना बेहद जरूरी है। लेकिन भारत में नींद से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ज्यादातर लोगों को ऐसी बीमारियों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। उन्हें यह बताना बेहद जरूरी हो गया है कि और इस बीमारी का कई तरीकों से इलाज संभव है। नींद से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक रेसमेड इंडिया ने एक कैंपेन, यानी #WakeUpToGoodSleep की शुरुआत की है। रेसमेड डिजिटल हेल्थ और कनेक्टेड (स्लीप एवं रेस्पिरेटरी केयर) डिवाइसेस के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी द्वारा इस कैंपेन के जरिए लोगों को बताया जाएगा कि आज, लाखों भारतीय नींद से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर मामलों में इसका पता नहीं चल पाता है।
2019 में लैन्सेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि, भारत में करोड़ो लोग स्लीप एप्निया से पीड़ित हैं। नींद से जुड़ी बीमारियों का इलाज नहीं कराने से हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है, जिनमें हार्ट-अटैक, डायबिटीज, डिप्रेशन, और इसी तरह की कई बीमारियां शामिल हैं। इसलिए, नींद से जुड़ी बीमारियों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी हो गया है।
इस डिजिटल कैंपेन के जरिए पीड़ित लोगों के साथ-साथ डाॅक्टरों को भी नींद से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। इस कैंपेन के एक हिस्से के रूप में रेसमेड ने एक शाॅर्ट एजुकेशनल फिल्म भी लाॅन्च की है, जिसमें स्लीप एप्निया और उससे जुड़े लक्षणों के बारे में दिखाया गया हैं। स्लीप एप्निया नींद से संबंधित एक बीमारी है और लोगों को मालूम ही नहीं है कि इस बीमारी का हमारी सेहत पर कितना बुरा असर होता है, जिसमें थकान, मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और यहां तक कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं भी शामिल हैं। इस फिल्म में रात को गहरी नींद सोने के महत्व के बारे में अच्छी तरह बताया गया है।
रेसमेड ने स्लीप कोच असिस्टेंस सेवा शुरू की है जो पीड़ितों की हर प्रकार की सवालो तथा नींद सम्बंधित जानकारी के बारे में बताते हैं, ताकि मरीज रात में चैन की नींद का आनंद ले सकें। इस सेवा के जरिए स्लीप डिसऑर्डर से जूझ रहे मरीजों की मदद की जाती है। इसमें ‘होम स्लीप टेस्ट’ के जरिए स्लीप एप्निया का पता लगाया जाता है, और फिर इसके मरीजों को इलाज के अलग-अलग तरीकों के बारे में अच्छी तरह समझाया जाता है। डाॅक्टरों के मुताबिक सीपीएपी (कंटीन्यूअस पाॅजिटिव एयरवे प्रेशर) इस बीमारी का गोल्ड स्टैण्डर्ड (सर्वश्रेष्ठ) थेरेपी हैं। इसके अलावा, उन्हें बिना किसी परेशानी के डिवाइस के इंस्टाॅलेशन तथा डिवाइस की खरीद के लिए ईएमआई योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाती है और ऑफर के बारे में बताया जाता है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सीमा अरोड़ा- नेशनल मार्केटिंग हेड, एशिया एवं लैटिन अमेरिका, रेसमेड ने बताया, भारत जैसे बड़े देश में लोगों के बीच नींद के बारे में जागरूकता का स्तर बेहद कम है। स्लीप थेरेपी के क्षेत्र में नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाने वाले रेसमेड ने इस अभियान के माध्यम से भारतीयों के बीच जागरूकता फैलाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें चिकित्सा समुदाय भी शामिल है। रेसमेड का यह अभियान एक सरल विचार – क्योंकि नींद अच्छी तो दिन अच्छा’ से प्रेरित है। यह विचार इस सच्चाई को उजागर करता है कि, नींद से संबंधित बीमारियां किस तरह हमारी पूरी सेहत पर बुरा असर डालती हैं।
रेसमेड इंडिया ने डाॅ. मनवीर भाटिया और उनकी स्लीप सोसाइटी – ASSM ऐस स्कूल ऑफ स्लीप साइंस, तथा डाॅ. सुजीत राजन सहित देश के कुछ प्रमुख स्लीप एक्सपर्ट के साथ मिलकर वेब-एजुकेशन सीरीज की शुरुआत की है, ताकि डाॅक्टरों को भी नींद से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताया जा सके और उन्हें जागरूक किया जा सके। मई 2020 के बाद से रेसमेड ने अपने इस शिक्षा जागरूकता अभियान के तहत पूरे भारत में 700 से अधिक डाॅक्टरों को सर्टिफाई किया।
भारत की जानी-मानी स्लीप स्पेशलिस्ट, डाॅ. मनवीर भाटिया ने कहा, आज लगभग पांच से दस प्रतिशत भारतीय नींद से संबंधित बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का पता ही नहीं है और वे नहीं जानते कि इसका उनकी सेहत पर कितना बुरा असर होता है। लोगों में नींद के बारे में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है, ताकि सभी लोग अच्छी नींद को अपने संपूर्ण स्वास्थ्य के आवश्यकता रूप में स्वीकार करें और वे शरीर में होने वाली दूसरी बीमारियों तथा नींद के बीच के संबंध को समझ सकें। डाॅक्टरों के लिए प्रशिक्षण सत्र, जन-जागरूकता अभियान और स्लीप कोच असिस्टेंस सेवाओं के जरिए लोगों को इस बारे में जागरूक बनाया जा सकता है। इन उपायों से लोगों के बीच चैन की नींद सोने की अहमियत बढ़ेगी।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के दौर में रेसमेड के इनोवेटिव एवं कनेक्टेड स्लीप साॅल्यूशंस, मरीजों को अस्पताल के बाहर भी बेहतर ढंग से इलाज कराने में मदद कर रहे हैं। इसके नेटवर्क में 10 मिलियन से ज्यादा डिवाइस को क्लाउड से कनेक्ट किया गया है, जो डाॅक्टरों को दूर रहकर भी अपने मरीजों की निगरानी करने की सुविधा प्रदान करते हैं। दूसरी ओर, मरीज भी डाॅक्टर को अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं और डायग्नोसिस के बाद अपनी नींद की बीमारी का इलाज करा सकते हैं। स्लीप कोच असिस्टेंस सेवा हेतु बुकिंग कराने, या फिर स्लीप टेस्ट कराने के लिए टोल-फ्री नंबरः 1800-103-3969 पर काॅल कर सकते हैं।

