लाइफस्टाइल डेस्क: चित्रकूट एक आध्यात्मिक आश्रय स्थल है। और यदि आप अनदेखी जगहों के प्रति रुचि रखते हैं तो चित्रकूट बिलकुल सही जगह है | यहां आपको धार्मिक स्थल के अलवा सांस्कृतिक व ऐतिहासिक स्थलों को भी देख सकते है |
इस स्थान का उल्लेख वाल्मीकि जी ने रामायण में किया है | राम से संबंधित पूरे भारतीय साहित्य में इस स्थान को एक अगल जगह मिली है | महाकवि कालिदास ने भी चित्रकूट के आकर्षण से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने मेघदूत में अपने यक्ष के निर्वासन का स्थान चित्रकूट को बनाया। हिंदी के संत-कवि तुलसीदास जी भी इस स्थान का अत्यंत आदरपूर्वक उल्लेख किया है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश क्षेत्र में 84 कोस तक प्रभु राम, माता सीता व लक्ष्मण के 11 साल छह माह 18 दिन के वनवास काल के स्थल अब भी जीवंत हैं।
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ऐसा माना जाता है की रामचरित मानस के रचयिता भक्त कवि गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली यमुना तट पर है और जन्म कुटीर मंदिर में वर्तमान में भी उनकी हस्तलिपि में मानस के कुछ अंश रखे हैं। कौशांबी जिले के महेवा घाट में उनकी पत्नी रत्नावली का गांव है। कथावाचक संत मोरारी बापू इस स्थल पर रोजाना भंडारा कराते हैं।

