नई दिल्ली: दलित मजदूर अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर को 12 जनवरी को हरियाणा पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया था जब वे सिंघु बॉर्डर के नजदीक कुंडली की एक फैक्टरी में मजदूरों के वेतन के लिए आवाज बुंलद कर रही थीं। पुलिस ने नवदीप पर जबरन वसूली और हत्या के प्रयास जैसे आरोप लगाए हैं। नवदीप कौर को 12 फरवरी को जमानत मिली है।
लाठियों और जूतों से पीटा
नवदीप ने बताया कि उन्हे पुरुष पुलिस वालों ने गिरफ्तार कर जबरदस्ती जीप में ठूंस दिया था। पुलिस की गाड़ी में उन्हें लाठियों और जूतों से पीटा गया। मजदूर अधिकार संगठन की सदस्य नवदीप कौ को कुंडली थाने ले जाया गया जहां उन्हें फिर से प्रताड़ित किया गया और आखिर में उन्हें सोनीपत ले जाया गया।
लगातार मिलती थीं गालियां
नवदीप ने बताया कि, “दोनों ही थानों में कोई महिला कांस्टेबिल नहीं थी। उन्होंने मुझे ऐसा पीटा था कि कई दिन तक मैं चल भी नहीं सकी। वे लगातार मुझे गालियां देते और कहते कि दलित हो तो दलित की ही तरह व्यवहार करो। वे मुझे कहते तुम्हारा काम नालियां साफ करना है किसी फैक्टरी मालिक के खिलाफ आंदोलन करना नहीं।”
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुआ था गिरफ़्तारी का विरोध
नवदीप की गिरफ्तारी का मुद्दा अंतरराष्ट्री स्तर पर उठा था। अमेरिकी की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने नवदीप की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए उन्हें रिहा करने की मांग की थी। नवदीप को जमानत दिलाने में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ने मदद की।
पुलिस सरकारी प्रताड़ना का एक हथियार
हरियाणा पुलिस ने नवदीप पर तीन मामले लगाए हैं। उसमें हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, दंगा फैलाने और धमकाने के आरोप शामिल हैं। सोनीपत पुलिस ने नवदीप पर पुलिस के ऊपर हमला करने का भी आरोप लगाया था। करीब 45 दिन हिरासत में रहने के बाद नवदीप को आखिर 12 फरवरी को जमानत मिल गई थी। नवदीप कहती हैं कि, “पुलिस तो सरकारी प्रताड़ना का एक हथियार है जिसे आम लोगों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।”
पुलिस का आरोपों से इंकार
लेकिन पुलिस ने नवदीप के आरोपों से इनकार किया है, जबकि चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई नवदीप की मेडिकल जांच में उनके शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं। नवदीप के बाएं पैर में सूजन है और बाएं पैर का नाखून उखड़ गया है, साथ ही पैर की दूसरी और तीसरी उंगली की हड्डियां टूट गई हैं। इसके अलावा 25 जनवरी को सोनीपत के सिविल अस्पताल में हुई मेडिकल जांच में भी नवदीप की बाईं जांघ और कूल्हों पर पीटे जाने के नीले निशान मिले हैं।
सिंघु बॉर्डर पर हैं किसानों के साथ
नवदीप जेल से रिहा होने के बाद सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के साथ ही रह रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें इसलिए प्रताड़ित किया क्योंकि वे किसानों का समर्थन कर रही थीं। नवदीप कहती हैं कि सरकार उन्हें जाति और धर्म के नाम पर बांटना चाहती है। नवदीप के साथ ही गिरफ्तार एक और आंदोलनकारी शिव कुमार को अभी जमानत नहीं मिली है। नवदीप बताती हैं कि शिव कुमार का हाथ टूट गया है, लेकिन वह अभी भी जेल में ही है।

