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Sri Lanka Crisis: दिवालिया श्रीलंका ने रूस से की मदद की गुहार, तेल के लिए फैलाए हाथ

नई दिल्ली। दिवालिया हुआ श्रीलंका खुद को दोबारा अपने पांव पर खड़ा करने के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में श्रीलंका ने रूस से मदद की गुहार लगाई है। श्रीलंका  राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को फोन कर उधार तेल की आपूर्ति की गुहार लगाई है। राष्‍ट्रपति पुतिन से फोन पर बातचीत के दौरान उन्‍होंने कहा कि उनके देश को तत्‍काल प्रभाव से मदद की जरूरत है। इस दौरान दोनों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों और आपसी सहयोग पर भी बातचीत हुई। बता दें श्रीलंका अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज लेने की कोशिश कर रहा है।

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गोटाबाया ने ट्वीट कर कहा है कि उन्‍होंने राष्‍ट्रपति पुतिन का पिछले कुछ समय में दिए गए समर्थन के लिए धन्‍यवाद किया है। इसी के साथ पर्यटन, ऊर्जा उद्योग समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्‍ट्रपति गोटाबाया ने बातचीत को काफी सार्थक बताया है। गोटाबाया ने ट्वीट में बताया  कि उन्‍होंने राष्‍ट्रपति पुतिन से रूसी एयरलाइंस एयरोफ्लोत को दोबारा शुरू करने की अपील की। उनके मुताबिक दोनों नेता आपसी सहयोग को बढ़ाने पर राजी  हैं। गोटाबाया ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता के नए और मजबूत संबंध बनेंगे। रूस से क्रेमलिन की तरफ से जारी बयान में इस बातचीत की पुष्टि की है। इसमें कहा है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा, कृषि व ट्रांसपोर्ट में आपसी सहयोग बढ़ाने की बात कही गयी है। दोनों देश आपसी संबंधों की 65वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। क्रेमलिन से जारी बयान में कहा है कि रूस ने श्रीलंका के साथ विभिन्‍न मुद्दों पर सहयोग का वादा किया है। 28 जून को श्रीलंका सांसद महिंदानंदा ने बताया था कि उन्‍होंने रूस राजदूत से दोनों देशों के प्रमुखों की बातचीत कराने में सहयोग की अपील की। उन्‍होंने श्रीलंका में व्‍याप्‍त तेल संकट को कम करने को 10 जुलाई के बाद तेल की निर्बाध आपूर्ति कराने की अपील की थी। तेल की कमी के चलते सभी सरकारी और निजी स्‍कूलों में अवकाश की घोषणा की गई है।

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श्रीलंका आजादी के बाद से पहली बार इस तरह के बदतर आर्थिक हालातों का सामना कर रहा है। श्रीलंका की अर्थव्‍यवस्‍था पटरी से उतर चुकी है। देश में खाने-पीने समेत अन्‍य चीजों की कमी है। इन सभी के बीच देश में हुए विरोध प्रदर्शनों में राष्‍ट्रपति गोटाबाया से इस्‍तीफा देने की मांग उठ रही है। देश में ल प्रदर्शनों को देखते हुए पीएम महिंदा राजपक्षे को इस्‍तीफा देना पड़ा है। जिसके बाद रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाया गया था।

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