बाबा रामदेव वाली कंपनी पतंजलि पर अक्सर कंपनी के उत्पादों को लेकर भ्रामक विज्ञापन जारी करने के आरोप लगते रहते हैं लेकिन अब पतंजलि की इस हरकत पर सुप्रीम कोर्ट की नज़र टेढ़ी हो गयी है. देश की शीर्ष अदालत ने पतंजलि द्वारा जारी किए गए विज्ञापन को भ्रामक और गलत ठहराते हुए उसपर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। इसके साथ ही बाबा रामदेव की पतंजलि को गलत और भ्रामक विज्ञापन जारी करने के लिए मानहानि नोटिस भी जारी कर दिया है।
बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ साक्ष्य-आधारित दवा को बदनाम करने के लिए कार्रवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है, ये मांग इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी याचिका में की थी। बार एंड बैंच द्वारा बताई गई जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने पिछले निर्देशों के विपरीत ट्रेडिशनल केमिकल बेस्ड मेडिसिन पर पतंजलि के दावों के पीछे जो तर्क दिए गए थे उस पर सवाल उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे देश को दो साल तक भ्रम में रखा गया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने न्यूजपेपर में दिए गए पतंजलि के विज्ञापन को पूरी तरह से निराश करने वाला बताया है। माननीय जज ने गुस्से में कहा कि इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वो आज सख्त आदेश देने जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि आप इस आर्युवेदिक दवा के जरिए लोगों को कैसे ठीक कर सकते हैं? आप ने ये दावा किया कि आपकी दवा केमिकल-बेस्ड मेडिकल कंपनी से अच्छीहै। आप ने लोगों को लगभग 2 साल भ्रम में रखा, क्या आप इसका इंतजार कर रहे थे कि ड्रग एक्ट के जरिए आप के ऊपर पर प्रतिबंध लगे।