कोरोना की जद में आ गए थे आजाद कानपुरी
मंचों पर अपने तेवर की गजलो व ओज गीतों से पहचान बनाई
“जमाने में जितनी परेशानियां हैं” हमारी तुम्हारी मेहरबानिया हैं ” जैसी गजल से लोगों को झकझोर देने वाले देश के जाने माने ऊर्जावान गजलगो लालमन “आजाद कानपुरी” गुरुवार को गोकुलवासी हो गए. 10 सितंबर की सुबह 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. वह कोरोना वायरस की जद में आ गए थे. जिसके बाद से उनका इलाज चल रहा था. गजल गो के जाने से उनके चाहने वालों में निराशा छा गई. अपनी गजल के माध्यम से वह युगों तक लोगों के जेहन में जिंदा रहेंगे.
साहित्य की मशाल को गांवों तक भी ले गए
उनके दो गज़ल संग्रह “आइना आज का” वर्ष 1996 तथा ‘वक़्त की आवाज’ वर्ष 1999 में पब्लिश हुआ था. दूर संचार विभाग कानपुर से सेवानिवृत्त आजाद जी का जन्म 03जून 1946 को ग्राम व पोस्ट रायपुर जिला कानपुर (देहात) मे हुआ था. आजाद साहित्यिक संस्था के माध्यम से उन्होंने कवि सम्मेलन मुशायरे आयोजित कर साहित्य की मशाल शहर ही नहीं गांव तक ले गये.अपनी धुन के पक्के आजाद कानपुर ने देश के मंचों पर अपने तेवर की गज़लो व ओज ओज गीतों से पहचान बनाई. उनके शेर व मुक्तक मंच संचालक खूब प्रयोग करते हैं.

