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खौफ: कोरोना टीकाकरण टीम को देख कर सरयू नदी में कूदे ग्रामीण


खौफ: कोरोना टीकाकरण टीम को देख कर सरयू नदी में कूदे ग्रामीण

अधिकारियों के समझाने के बावजूद सिर्फ 14 ग्रामीणों ने ही लगवाई वैक्सीनन

बाराबंकी। कोरोना संक्रमण की रफ्तार को थामने के लिए देशभर में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। शहरों के टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सी न लगवाने वालों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है। लोगों में उत्साह है और वह वैक्सीन लगवाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी टीकाकरण को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। तरह-तरह की भ्रांतियां ग्रामीणों के मन में घर किये हुए हैं। टीकाकरण को लेकर ग्रामीणों के मन में कितनी आशंका है यह देखने को मिला बाराबंकी जिले में जहां के एक गांव में टीकाकरण करने आई टीम को देखकर ग्रामीण सरयू नदी में कूद गए। बाद में अधिकारियों के समझाने के बाद भी मात्र 14 लोगों ने ही कोरोना वैक्सीन लगवाई।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की तहसील रामनगर के गांव सिसौड़ा में स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए पहुंची। टीका लगाने के लिए आई टीम के बारे में जानकारी मिलते ही ग्रामीण डर गए और गांव के बाहर सरयू नदी के पास जाकर बैठ गए। गांव में ग्रामीणों को तलाश रही स्वास्थ्य विभाग की टीम को जब ग्रामीणों के सरयू नदी के पास बैठे होने का पता चला तो वह उनके पास पहुंच गयी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखते ही भयभीत हुए ग्रामीण सरयू नदी में कूद गए। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के पास आने पर सरयू नदी के और भीतर चले जाने की चेतावनी भी दे डाली। ग्रामीणों को बहती नदी में अंदर जाते देख कर स्वास्थ्य विभाग की टीम के होश उड़ गए और उन्होंने अपने बढ़ते कदमो को वही रोक लिया। बाद में ग्रामीणों के सरयू नदी में घुस जाने की सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी रामनगर और नोडल अधिकारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों को टीकाकरण अभियान के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीण सरयू नदी से बाहर तो आ गए मगर टीका लगवाने के लिए राजी नहीं हुए। काफी प्रयासों के बाद मात्र 14 लोगों ने ही कोरोना वैक्सीन लगवाई जबकि गांव की आबादी पंद्रह सौ के लगभग है।

यह घटना जाहिर कहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को अब भी कोरोना के बढ़ते खतरे और कोरोना का टीका लगवाने के लाभ के प्रति जागरूक नहीं किया गया है। कोरोना टीकाकरण को लेकर ग्रामीणों में अनेक प्रकार की भ्रांतियां फैली हुई हैं जिनको दूर किए बिना कोरोना टीकाकरण अभियान को सफल बना पाना मुश्किल है।

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