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बच्चों को रखना चाहते है बीमारियों से दूर, तो टिफिन में ये चीज़ें देने से बचे

बच्चे जिद्दी होंगे, लेकिन अगर आप उनकी जिद मानकर टिफिन में चिप्स, मैगी, केक, पेस्ट्री जैसे अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थ पैक कर रहे हैं तो भविष्य में बच्चों को कई स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। स्कूल खुल गए हैं और कामकाजी माता-पिता के लिए सुबह खुद को तैयार करने के साथ-साथ बच्चे को तैयार करना, उनका लंच बॉक्स पैक करना निस्संदेह एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। कई बार देरी या विकल्प न होने के कारण वे बच्चों के टिफिन में ऐसी चीजें पैक कर देते हैं जो बच्चे को तो पसंद होती है लेकिन क्या आप ये जानते है कि वो चीजे आपके बच्चे के लिए कितनी नुकसनादायक हो सकती है ये तो हम सभी जानते हैं कि अस्वास्थ्यकर खान-पान मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग जैसी कई बीमारियों की जड़ है और ऐसे में हम बचपन से ही जाने-अनजाने बच्चे को इन बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हमेशा स्वस्थ रहे तो आपको लंच बॉक्स में उसे इन सब चीजो को देने से बचना चाहिए –

मैगी या नूडल्स

दो मिनट में तैयार होने वाली मैगी लगभग हर बच्चे को पसंद होती है, लेकिन मैगी या नूडल्स मैदे से बनी होती है. मैदे में कोई पोषण नहीं होता इसलिए इसे खाने से पेट और दिमाग तो भर जाता है लेकिन शरीर को कोई फायदा नहीं मिलता। इसलिए लंच बॉक्स में इसे देना बिल्कुल भी सही विकल्प नहीं है।

बासी खाना

देर होने के कारण कई बार माएं बच्चों के लंच बॉक्स में बची हुई सब्जी या रोटी पैक कर देती हैं, क्या आप भी उनमें शामिल हैं? अगर हां, तो आप जानते ही होंगे कि गर्मियों में बासी खाना कितनी जल्दी खराब हो जाता है, ऐसे में उन्हें फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। जिसके कारण वे लंबे समय तक बीमार पड़ सकते हैं इसलिए बासी खाना देने की गलती न करें।

तला हुआ खाना

पूड़ी, कचौरी खाने में अच्छी लगती हैं और ये जल्दी बन भी जाती हैं, लेकिन ज्यादा तला हुआ खाना खाने से बच्चे बचपन में ही मोटापे का शिकार हो सकते हैं. सिर्फ मोटापा ही नहीं बल्कि तले हुए खाद्य पदार्थ भी कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ाने का काम करते हैं।

अस्वास्थ्यकर नाश्ता

चिप्स, कुकीज, पैक्ड खाद्य पदार्थ बच्चों को बहुत पसंद आते हैं। भूख लगने पर वे सबसे पहले ऐसी चीजें खाना पसंद करते हैं, लेकिन ये बेहद अस्वास्थ्यकर विकल्प हैं क्योंकि इनमें नमक और चीनी दोनों की मात्रा अधिक होती है, जो बच्चों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार बना सकती है।

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