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अटल सेतु: अच्छा है पर मंहगा है

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अमित बिश्नोई
पीएम मोदी ने शुक्रवार को देश के सबसे लंबे समुद्री पुल अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु का उद्घाटन कर दिया। ये सिर्फ देश का सबसे लम्बा समुद्री पुल ही नहीं बल्कि किसी भी तरह का सबसे लम्बा पुल हैं, इस पुल के निर्माण में जापान का भी बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि फंडिंग का इंतज़ाम करने में जापान इंटरनेशनल कार्पोरेशन एजेंसी की बहुत बड़ी भूमिका है, साथ ही इस पुल के निर्माण के लिए हमें लार्सन एंड ट्यूब्रो, आईएचआई इंफ्रास्ट्रक्चर, देवू इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन और टाटा प्रोजेक्ट का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए क्योंकि इस प्रोजेक्ट को PPP मॉडल के तहत इन कंपनियों ने मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी की निगरानी में पूरा किया। 22 किलोमीटर लम्बे 6 लेन के इस पुल को तैयार होने में 9 साल लग गए. निश्चित तौर पर ये पुल भारत की इंजीनियरिंग कुशलता का एक परिचायक है, देश के लोगों के लिए गर्व की बात भी है. उम्मीद है कि अटल पुल सदियों तक अटल रहेगा। पुल बहुत शानदार है बहुत अच्छा है मगर जब हम इसके टोल यानि किराये पर नज़र डालते हैं तो पहली प्रतिक्रिया यही निकलती है कि अच्छा है पर मंहगा है. चलिए इसपर बात करने से पहले पुल के निर्माण को लेकर, उसकी विशेषताओं और फायदों पर थोड़ी बात करते हैं, क्योंकि सकारात्मकता पहले होनी चाहिए।

अटल सेतु का शिलान्यास दिसंबर 2016 में हुआ था, ज़ाहिर सी बात है कि ये प्रधानमंत्री मोदी के कर कमलों से ही हुआ होगा न कि किसी और के। ये पुल 17,840 करोड़ रुपये में तैयार हुआ है, पैसों का इंतज़ाम किसने किया और किसने अटल सेतु को बनाया ये मैं शुरुआत में बता चुका हूँ। ये पुल साउथ मुंबई को नवी मुंबई में न्हावा-शेवा से जोड़ता है. 6 लेन के इस ट्रांस-हार्बर पुल की एक्जैक्ट लम्बाई 21.8 किलोमीटर है और अब सिर्फ 20 मिनट में साउथ मुंबई से नवी मुंबई पहुँच सकते हैं. अगर कम्बख्त कोविड न आया होता तो इस अटल सेतु पर काफी पहले ही गाड़ियां दौड़ने लगतीं, खैर कोई बात नहीं सेतु को देश को समर्पित करने की ये सबसे सटीक टाइमिंग है, देश में राम मय माहौल है, लोकसभा चुनाव भी सिर पर हैं तो ऐसे में इसके उद्घाटन की इससे अच्छी टाइमिंग और क्या हो सकती थी. छोटे वाहनों का इस पुल पर दौड़ना वर्जित है, आप बाइक लेकर नहीं जा सकते, ट्रैक्टर और ऑटो भी लेकर नहीं जा सकते। अटल सेतु पर गाड़ियों की गतिसीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा है और प्रतिदिन ये सेतु 70 हज़ार वाहनों का भार उठा सकता है.

अटल सेतु को लेकर ये सभी आंकड़े इसे बहुत बड़ा बनाते हैं लेकिन इसपर लगने वाला टोल टैक्स इसे और भी बड़ा बनाता है. इस सेतु से गुजरने वाले वाहनों में सबसे कम टोल 250 रूपये कार के लिए हैं वो भी सिंगल जर्नी के लिए, तो मान लें कि अगर अटल सेतु पर जैसे की 70 हज़ार की क्षमता बताई गयी है सिर्फ सिंगल जर्नी के लिए इतनी कारें गुज़रती हैं तो भी 17500000 रूपये की आय डेली सुनिश्चित है. अब चलिए अलग अलग गाड़ियों के लिए उसका टोल जान लेते हैं। तो कार का एकतरफ का टोल 250 रूपये है और अगर आना जाना है तो 375 रूपये चुकाने होंगे, कार का डेली पास 625 रूपये का है वहीं मंथली पास 12,500 रूपये, मतलब मंथली पास को अगर 12 महीनों से जोड़ दें तो आपको सालाना डेढ़ लाख चुकाने होंगे।

मिनी बस के लिए एक तरफ टोल टैक्स 400 रुपये, रिटर्न जर्नी के लिए 600 रुपये, डेली पास 1000 रुपये और मंथली पास बीस हज़ार रूपये यानि वार्षिक दो लाख 40 हज़ार हुआ. बस या 2 एक्सेल ट्रक अगर एक तरफ ही गुज़रता है तो टोल 830 रुपये, रिटर्न जर्नी के लिए टोल 1245 रुपये हो जायेगा, डेली आने जाने के लिए 2075 रुपये और मंथली पास बनवाना हो तो 41,500 रुपये , मतलब वार्षिक जोड़ें तो 4 लाख 98 हज़ार रूपये। एमएवी (3 एक्सेल) ट्रक के लिए एक तरफ का टोल 905 रुपये, रिटर्न जर्नी 1360 रुपये में, डेली पास 2265 रुपये और मंथली पास का चार्ज 45,250 रुपये जो वार्षिक बन जायेगा 5 लाख 43 हज़ार रूपये। 4 से 6 एक्सेल के एमएवी के लिए एक तरफ का टोल 1300 रुपये, आना जाना 1950 रुपये में, डेली पास 3250 रुपये और मंथली पास 65,000 रुपये में बनेगा, वार्षिक जोड़ें तो 7 लाख 80 हज़ार रुपए टोल बनता है। ओवरसाइज्ड व्हीकल के लिए सिंगल जर्नी टोल 1580 रुपये में, रिटर्न जर्नी 2370 रुपये में, डेली पास 3950 रुपये और मंथली पास 79,000 रुपये में बनेगा, मतलब सालाना 9 लाख 48 हज़ार का टोल चुकाना होगा। अब कुछ पाने के लिए कुछ देना तो पड़ता ही है. साउथ मुंबई से नवी मुंबई अगर 20 मिनट में पहुंचना चाहेंगे तो कुछ तो कीमत चुकानी ही होगी।

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