लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – इस समय चुनावी घमासान चरम पर है। सभी राजनैतिक दल पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में हैं। प्रदेश के इटावा जिले की जसवंत नगर सीट इस बार फिर सुर्खियों में है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भाई प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के शिवपाल सिंह यादव फिर इस सीट से चुनावी मैदान में हैं। तमाम नारजगी के बाद आखिर में शिवपाल और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समझौता कर इस चुनाव में साथ आए हैं। यह सीट इटावा जिले की सैफई तहसील और ताखा तहसील समेत कई थानों को मिलाकर बनी है। जसवंत नगर कस्बा आगरा-कानपुर हाईवे के पास बसा है। इसी विधानसभा क्षेत्र में सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी भी है, जहां आसपास के जिलों के लोग इलाज कराने पहुंचते हैं। जसवंत नगर की रामलीला को यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया है।
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ये है इस सीट का इतिहास
इस सीट के इतिहास पर नजर डालें तो शिवपाल सिंह यादव 1996 से लेकर 2017 तक जसवंत नगर सीट से चुनाव जीतते आए हैं। वर्ष 1993, 1991, 1989 में शिवपाल सिंह यादव के बड़े भाई और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव इस से विधायक चुने गए थे। इसके साथ ही 1985 में भी मुलायम इस सीट से विधायक चुने गए थे। तो वहीं 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में बलराम सिंह यादव इस सीट से विधायक बने थे। 1977 में जेपीएन के टिकट पर चुनाव लड़कर मुलायम सिंह यादव इस सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
जसवंतनगर में भाजपा देती रही है टक्कर
जसवंतनगर विधानसभा सीट को राजनीतिक दृष्टिकोण से समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। पिछले चुनावों के इतिहास पर नजर डाले तो यहां बीजेपी टक्कर देती रही हैं, हालांकि एक बार भी जीत नहीं दर्ज कर पाई।
मतदाता और जातीय समीकरण जसवंत नगर विधानसभा सीट पर कुल मतदाता संख्या- 3,90,297 है। जिसमें 2,950,38 पुरूष और 1,807,41 महिला मतदाता है। इसी के साथ किन्नर मतदाताओं की संख्या 18 है।

