भाजपा शासित असम की हेमंत बिस्वा सरमा सरकार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर तरह तरह की विवादस्पद घोषणाएं करती रहती है , असम सरकार ने अब एलान किया है कि वह प्रदेश के 48. 53 प्रतिशत आबादी वाले अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक होने का प्रमाणपत्र जारी करेगी। असम सरकार का कहना है कि प्रदेश में अल्पसंख्यकों की पहचान करने में आसानी होगी और उनके लिए योजनाएं बनाने में भी सुगमता आयेगी।
असम सरकार के मुताबिक 34.22% मुस्लिम, 3.74% ईसाई, 0.07% सिख, 0.18% बौद्ध और 0.08% आबादी वाले जैन समुदाय, जो माइनॉरिटी में हैं इन्हें सरकार माइनॉरिटी सर्टिफ़िकेट जारी करेगी। इस बात का फैसला 29 मई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजोदड़गी में कैबिनेट ने लिया है.
सरकार के मंत्री केशब महंता ने फैसले की जानकारी दी कि ऐसा पहली बार होगा कि किसी राज्य में अल्पसंख्यकों को प्रमाणपत्र जारी किये जाएंगे, हालंकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह कब से शुरू होगा, उनके मुताबिक इसकी रूपरेखा बन चुकी है और जल्द ही इसपर क्रियान्यवन होगा। सरकार को इस तरह के फैसले की ज़रुरत क्यों पड़ी, इस बात का जवाब भी केशब महंता ने अजीब सा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों के लिए बहुत कुछ करना चाहती है इसलिए यह कदम उठा रही है. उनसे जब पूछा गया प्रदेश में अल्पसंख्यक विभाग के होते हुए पहचान कैसे नहीं हो पा रही, इस पर उन्होंने कहा कि हां विभाग तो है लेकिन अल्पसंख्यकों की पहचान करने में मुश्किल आ रही है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे में भारत सरकार ने अभी हाल ही में बताया था कि किसी प्रदेश में अगर किसी धर्म या भाषा के आधार पर लोगों की आबादी 50% से कम है तो उसे अल्पसंख्यक माना जाएगा.

