लोगों को हो रही आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी
हाइवे पर शाम ढलते ही छाने लगती है धुंध, यातायात हो रहा प्रभावित
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। सर्दी शुरू होते ही धुंध ने भी अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। शाम ढलते ही वातावरण में धुंध छाने लगती है। धुंध के कारण वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है, जिसके कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं धुंध अब यातायात को भी प्रभावित करने लगी है। खासकर हाइवे पर तो शाम ढलते ही धुंध छाने लगती है।
कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए लाॅकडाउन के दौरान औद्योगिक गतिविधियां बंद रहीं वहीं सड़कों पर भी वाहनों की आवाजाही काफी कम रही। लाॅकडाउन के दौरान जहां आसमान साफ और वातावरण स्वच्छ नजर आया वहीं अनलाॅक शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर बढ गया है। अनलाॅक के दौरान शुद्ध हवा का आनंद लेने वाले लोगों के लिए अब सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। क्योंकि वायु प्रदूषण के चलते हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस की बीमारियों को जन्म दे रहे हैं।
सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण मानक से कई गुना बढ़ जाता है, जिससे लोगों का खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि सर्दी के मौसम में वायु में मौजूद सूक्ष्म कण हवा में ही तैरते रहते हैं और सांस के जरिये फेफड़ों में इन्फेक्शन फैलाकर सांस लेने में तकलीफ पैदा करते हैं। ऐसे में लोग खांसी, जुकाम के साथ सांस लेेने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। वहीं नवंबर माह शुरू होते ही आसमान में धुंध छाने लगी है। वातावरण में मौजूद धुंध इस समस्या को खतरनाक स्तर पर ले आयी है।
ये हैं प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने का प्रमुख कारण चल रहे हाईवे के निर्माण कार्य, सड़कों पर उठते धूल के गुबार, सड़कों पर कूड़ा जलाये जाने तथा खेतों में किसानों द्वारा पराली जलाये जाना है। वहीं दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही वायु प्रदूषण के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि दीपावली पर छोडे़ जाने वाले पटाखे वातावरण को प्रदूषित करते हैं। वहीं शाम ढलते ही धुंध छा जाने से यातायात भी प्रभावित होने लगा है। हाइवे पर तो इतनी धुंध हो जाती है कि वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाता है।
वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए यह उपाय अपनाने जरूरी
वातावरण में छाये वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिये खेतों में किसानों द्वारा पराली जलाये जाने पर रोक लगाना आवश्यक है। वहीं खुले में कूड़ा जलाने के मामलों पर भी काबू पाना आवश्यक है। वहीं धूल के गुबार को रोकने के लिये निरंतर पानी का छिड़काव किया जाना चाहिये। चैराहों पर लगने वाले जाम को समाप्त करने से भी प्रदूषण को रोकने में मदद मिल सकती है जिसके लिये आवश्यक है कि यातायात व्यवस्था में पर्याप्त सुधार किया जाये।
वहीं वायु प्रदूषण से बचने के लिये मास्क पहनना बेहद आवश्यक है। उपयुक्त मास्क वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कणोें को सांस के जरिये फेफड़ों में जाने से रोकता है। वहीं आखों को प्रदूषण से बचाने के लिये चश्मा पहनें।

