- पार्टी स्तर पर जनसभाएं, धरना-प्रदर्शन आदि का दौर शुरू होने से बढ़ गयी प्रचार सामग्री की बिक्री
मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारियां कर रहीं विपक्षी पार्टियां भले ही एक-दूसरे से दूरी बनाकर रख रही हों, मगर एक जगह ऐसी भी है जहां सभी पार्टियों के लोग पहुंचते हैं। चाहे इन पार्टियों के बीच गठबंधन हो या वह-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ें, मगर सभी पार्टियों की प्रचार सामग्री एक साथ ही रखी जाती है। वह जगह है चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों की दुकान। इन दुकानों में सभी राजनीतिक दलों की टोपियां, बिल्ले, झंडे और पटके एक साथ रखे दिखाई देते हैं। इन दुकानों पर समाजवादी पार्टी और आप की टोपियां एक-दूसरे को पर चढ़ी दिखती हैं तो पार्टियों के झंडे एक ही बंधन से बंधे हुए नजर आते हैं। एक ही तार पर लाइन से टंगे होते हैं सभी पार्टियों के पटके तो एक बड़े से डिब्बे के अलग-अलग खानों में पार्टियों के बिल्ले मौजूद रहते हैं। आप किसी भी पार्टी के समर्थकों या नेता हों, इन दुकानों पर आइए और अपनी पार्टी से संबंधित प्रचार सामग्री ले जाइए।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। प्रत्याशी भले ही तय ना हुए हों लेकिन पार्टी स्तर पर जनसभाएं, धरना-प्रदर्शन आदि का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में पार्टी के झंडे, बिल्ले, टोपियां, पटका आदि धड़ल्ले से बिक रहे हैं। सियासी तापमान बढ़ने के साथ तेज होती बिक्री को देखकर चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों के चेहरे भी खिलने लगे हैं।
मेरठ महानगर में इंदिरा चौक के पास अनेक दुकानों पर चुनाव सामग्री बिकती है तो पुराने शहर में भी कई स्थाान हैं जहां राजनीतिक पार्टियों की प्रचार सामग्री थोक भाव में मिलती है। चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वाले अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों की संख्या और उनकी मांग के अनुसार पार्टियों का भाग्य तय कर लेते हैं। जिस पार्टी की प्रचार सामग्री अधिक बिकी तो उसका मतलब उसके समर्थक की संख्या सबसे अधिक है। इसका अर्थ यह माना जाता है कि उस पार्टी का वोट प्रतिशत और जीतने की संभावना भी अधिक है।
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बुजुर्ग मोहम्मद हनीफ जो अपनी 78 साल की उम्र में अनेक चुनाव देख चुके हैं और 40 साल से चुनाव प्रचार सामग्री बेच रहे हैं का कहना है कि अब तक तो भाजपा की प्रचार सामग्री ही सबसे अधिक बिकी है। ऐसे में अब तक तो भाजपा ही नंबर वन पार्टी दिख रही है। मोहम्मद हनीफ का आंकलन अपनी जगह सही हो सकता है मगर चुनाव आने में अभी समय है और राजनीति के पल-पल बदलने का दौर अभी आना बाकी है।अब चुनाव में जीत-हार भले ही किसी की भी हो लेकिन चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों की तो जीत पक्कीह है यह बात उनके खिले चेहरे बता रहे हैं।

