- लाॅकडाउन के एक साल ने देश को कोरोना से मुकाबला करने में बनाया सक्षम
- गलतियों से सीखा, पीपीई किट, वेंटिलेटर से लेकर वैक्सीन तक देश में बनायीं
सुनील शर्मा
24 मार्च 2020 को भारत में कोरोना संक्रमण के कारण लाॅकडाउन लगाया गया था। उस समय देश में कोरोना संक्रमण के 500 केस थे। अब लाॅकडाउन का एक साल गुजरने के बाद देश में तीन लाख 68 हजार 457 सक्रिय मरीज हैं। ऐसे में लोगों को यह चिंता हो रही है कि क्या देश में एक बार फिर से संपूर्ण लाॅकडाउन लगाया जा सकता है। क्या एक साल पहले की तरह भारतवासी एक बार फिर घरों में कैद हो जायेंगे। क्या ऑफिस, दुकानें, माॅल्स, सिनेमाघरों से लेकर बस-ट्रेनें बंद हो जायेंगी। एक साल पहले के कोरोना संक्रमण के मामलों की तुलना आज के सक्रिय केसों से करें तो यह आशंका निर्मूल भी नहीं है। मगर एक साल में बहुत सी उपलब्धियां ऐसी भी हैं जो कोरोना से मुकाबला करने की सामथ्र्य प्रदान करने में सक्षम है। ऐसे में देश भर में एक बार फिर से एक साथ संपूर्ण लाॅकडाउन लगने की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं। आईये जानते हैं पहले क्यों लगाना पड़ा लाॅकडाउन और अब क्या है हालात ..
तब 500 कोरोना संक्रमित भी थे काफी अधिक
एक साल पहले जब कोरोना संक्रमण पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिये हुए था तब देश में कोराना संक्रमितों की संख्या 500 थी। आज देश में तीन लाख 68 हजार 457 सक्रिय कोरोना संक्रमितों के आंकड़ों को देखें तो 500 संक्रमितों की संख्या बेहद कम नजर आती है। मगर उस समय की परिस्थितियों में यह संख्या काफी अधिक और भयाक्रांत करने वाली थी। उस वक्त विश्व भर से कोरोना संक्रमण की डराने वाली तस्वीरें सामने आ रहीं थीं। इस भयावह वायरस का न कोई इलाज सूझ रहा था और न ही इससे बचने का कोई तरीका किसी के पास था। यह वायरस कितना जानलेवा है, किन परिस्थितियों में इसका प्रसार अधिक होता है, किन हालातों में यह मरीज की जान ले सकता है को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी हमारे पास नहीं थी। हर दिन एक नयी सूचना आती और कोरोना संक्रमण का भय और बढ़ा जाती। पहले मुंह और नाक से कोरोना वायरस के शरीर में प्रवेश होने की बात कही गयी तो बाद में कहा कि यह कान से भी शरीर में समा सकता है। एन-95 मास्क का प्रयोग करने को प्रेरित करने के काफी समय तक करने के बाद उसे भी कोरोना संक्रमण से बचाव में बेअसर बताया गया। हर दिन बढ़ते कोरोना संक्रमित और एक नयी जानकारी ने लोगों को परेशान और भयाक्रांत किया हुआ था।
कोरोना संक्रमण से मुकाबला करने में सक्षम नहीं था भारत
कोरोना संक्रमण के चलते लाॅकडाउन जब लगाया गया तो भारत कोरोना संक्रमण से मुकाबला करने में सक्षम नहीं था। देश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था इस खतरनाक वायरस का मुकाबला करने को तैैयार नहीं थी। न पर्याप्त हाॅस्पिटल थे और न ही हाॅस्पिटलों में पर्याप्त सुविधाएं। उस वक्त देश में पीपीई किट का निर्माण भी बेहद कम हुआ करता था और अधिकतर पीपीई किट विदेशों से ही मंगाई जाती थी। हाॅस्पिटलों में वेंटिलेटरों की संख्या सीमित थी और पीपीई किट की तरह उसका आयात भी विदेशों से ही किया जाता था। वह दौर था जब हम लोगों को खाने से पहले हाथ धोना सिखा रहे थे ऐसे में सेनेटाईजर से बार-बार हाथ धोने को प्रेरित करना बेहद मुश्किल कार्य था। पहली बार ऐसी महामारी का सामना कर रहे स्वास्थ विभाग से लेकर सरकार तक को संक्रमण का मुकाबला करने का न तरीका पता था और न ही प्रसार रोेकने की विधि। ऐसे में कोरोना संक्रमित मिलते ही उसे जबरन अस्पताल में भर्ती करना और उस एरिया को कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर देना ही एकमात्र उपाय दिख रहा था। कोरोना संक्रमण का कोई प्रमाणिक उपचार भी किसी के पास नहीं था। ऐसे में अलग-अलग जगहों पर भिन्न तरीके से उपचार करने के मामले भी सामने आये। वहीं लोग मास्क पहनने को तैयार नहीं थे और सामाजिक दूरी बनाना वह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। ऐसे हालातों में सख्ती दिखाकर लोगों को जबरन कोविड-19 गाइडलाइन का पालन कराना पड़ा। जीवन में पहली बार ऐसी माहमारी को देखने वाले लोग ऐसे हालातों का सामना करने में असमर्थ महसूस कर रहे थे।
एक साल में बदल गये हैं हालात
देश में लगाये गये लाॅकडाउन का एक साल बीत गया और इस अरसे में हमने बहुत कुछ हासिल भी किया है। पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर तक का निर्माण देश में शुरू हो गया। आज देश के अस्पतालों में वेंटिलेटरों की संख्या पहले के मुकाबले काफी अधिक हो गयी है। आज भी कोरोना संक्रमण का प्रमाणिक उपचार हमारे पास नहीं है लेकिन लोगों का उपचार के बाद स्वस्थ होना जाहिर करता है कि हमारी स्वास्थ सेवाएं सही दिशा की ओर जा रही हैं। एक साल के भीतर देश ने न सिर्फ कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने के लिये वैक्सीन का निर्माण किया बल्कि 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। आज भारत कोरोना वैक्सीन का निर्माण इतने वृहद स्तर पर कर रहा है कि वह भारतवासियों का टीकाकरण करने के साथ अनेक देशों को वैक्सीन सप्लाई भी कर रहा है। एक अप्रैल से 45 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को वैक्सीन लगाना शुरू किये जाने के बाद वैक्सीनेशन अभियान में तेजी आयेगी और संक्रमण की चेन टूटने लगेगी। वहीं एक साल पहले जब लाॅकडाउन लगा तो हम हालातों का सामना करने के लिये बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। मगर इस एक साल ने हमें अस्थायी अस्पतालों का निर्माण करने से लेकर कोरोना की चेन को रोकने का तरीका तक समझा दिया। यही कारण है कि देश में कोरोना का नया स्ट्रेन फैलने से पहले की संक्रमितों और उनके संपर्क में आने वालों की पहचान कर ली गयी और नये स्ट्रेन का प्रसार नहीं हो पाया। वहीं एक साल में लोगोें को मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाने और सेनेटाइजेशन करने का महत्व भी पता चल गया है। सरकार के साथ सामाजिक संगठनों ने भी लोगों को जागरूक किया है। पूर्व की गलतियों से सबक लेते हुए कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ते ही अन्र्तराष्ट्रीय उड़ानों पर बंदिशे लगा दी गयी हैं। वहीं महाराष्ट्र सहित देश के कुछ राज्य जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक पीड़ित हैं वहां कुछ इलाकों में संपूर्ण लाॅकडाउन लगाने के साथ नाइट कफ्र्यू, गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराने जैसे आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं जिससे संक्रमण का प्रसार रोका जा सकेगा। वहीं होली पर सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगाने और किसी भी आयोजन के लिये पूर्व अनुमति लेने की बंदिशें लगा कर लोगों को एकत्रित करने से रोकने का प्रयास भी किया जा रहा है।
खुद को बचायें, देश लाॅकडाउन से बचेगा
वर्तमान परिस्थितियों में देश में संपूर्ण लाॅकडाउन लगने की संभावनाएं भले की कम नजर आ रहीं हों मगर इसका प्रसार बढ़ना चिंताजनक है। ऐसे में सरकार भले ही कितनी गाइडलाइन जारी कर दे या कुछ इलाकों में लाॅकडाउन लगा दे या कंटेनमेंट जोन बना कर संक्रमण का प्रसार रोकने का प्रयास करे यह नाकाफी होेगा आम जनता के सहयोग के बिना। कोरोना संक्रमण के बढ़ने का कारण लोगाें का कोरोना के खतरे को नजरअंदाज करना है। देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के साथ ही लोगोें ने मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाना और सेनेटाइजेशन करने की ओर ध्यान देना बंद कर दिया। वहीं सरकार द्वारा सरकारी स्वास्थ्य में निःशुल्क कोरोना टीकाकरण करवाने की सुविधा दिये जाने के बावजूद लोग टीका लगवाने के लिये आगे नहीं आ रहे हैं। ऐसे में यदि देश को लाॅकडाउन से बचाना है तो आपको खुद को कोरोना से बचाना होगा। सावधानी बरतें, समय आने पर वैक्सीनेशन करायें और इसके बाद भी कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करे। ऐसा कर आप भी सुरक्षित रहेंगे और आपके अपने भी।

