Thursday, October 21, 2021
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सूर्य ग्रहण: एक खूबसूरत खगोलीय घटना

ज़ीनत क़िदवाई

ज़ीनत क़िदवाई


20 जून 2020, आज विश्व कोरोना की समस्या से ग्रसित है, कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, भारत में भी कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और इसी कोरोना काल में 5 जून को चंद्र ग्रहण पड़ा और अब 21 जून को सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है| ज्योतिषों के अनुसार यह ग्रहण आर्थिक मंदी, महामारी प्राकृतिक आपदाओं का कारक बन सकता है|

साधकों के लिए श्रेष्ठ समय
शास्त्रों के अनुसार आषाढ कृष्ण अमावस्या, मृगशिरा नक्षत्र, खड़ग्रास ग्रहण 21 जून को लगेगा| यह समय तंत्र साधकों के लिए बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है| इस काल में की गयी साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है| यह ” कंकणा कृति वल्यकार” सूर्या ग्रहण है जिसमें सूर्य 98.6 % तक ढक जायेगा, पूर्णता की अवधि एक मिनट 17 सेकंड रहेगी, दिन में अँधेरा छा जायेगा और तारे दिखने लगेंगे|

क्यों होता है सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण एक खूबसूरत खगोलीय घटना है और 21 जून को होने वाली यह घटना इस बार बेहद ही दुर्लभ है, जो पृथ्वी पर सामान्य रूप से देखने को नहीं मिलता है. बताया जा रहा है कि इस ग्रहण की अवधि 5 घंटे 48 मिनट की है. ऐसा कहा जा रहा है ये ग्रहण हजार साल बाद ऐसा लगने वालै है. सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आ जाने की स्थिति से जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता है, तो इस स्थिति को ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

क्यों दुर्लभ हैं खगोलीय घटना
21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण इतनी दुर्लभ खगोलीय घटना क्यों है. दरअसल, ऐसा इसलिए है क्योंकि 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन होता है, इसे ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है. भारतीय संस्कृति के दृष्टिकोण से, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है और सूर्य के दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में बहुत लाभकारी है. ग्रीष्म संक्राति साल का सबसे बड़ा दिन होता है. ऐसा तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य की परिक्रमा करते हुए, सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर पहुंच जाती है. हर साल पृथ्वी पर दो संक्रांति देखने को मिलती है. एक ग्रीष्म और शीतकालीन अयनांत, जो तब होती है जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है और उसका झुकाव भी सूर्य की ओर नहीं होता.

लाइवसाइंस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले 2001 में 21 जून को ऐसा सूर्य ग्रहण देखने को मिला था. उससे पहले 1982 में भी 21 जून को इसी तरह का सूर्य ग्रहण देखा गया था. ऐसे में ये अनुमान है कि अगली बार 21 जून को सूर्य ग्रहण 2039 में लगेगा. इस वजह से यह सूर्य ग्रहण इतना दुर्लभ है.

सूर्य ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 9 बजकर15 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. सूर्य ग्रहण शुरुआत तमें आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और 10 बजकर 17 मिनट तक यह पूर्ण सूर्य ग्रहण की तरह दिखाई दे सकता है. पूर्ण सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) रविवार दोपहर को 2 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगा. जबकि आंशिक सूर्य ग्रहण 3 बजकर 4 मिनट पर खत्म होगा. साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण करीब 6 घंटों तक प्रभावी रहेगा. यह सूर्य ग्रहण भारत समेत चीन, अफ्रीका, कांगो, इथोपिया, नेपाल, पाकिस्तान आदि देशों में दिखाई देगा.

चूँकि यह ग्रहण सूतक काल में लग रहा है जो आज रात 09:15PM से शुरू होगा, इसलिए सूतक काल के दौरान पूजा घर और मंदिरों के पट बंद रहेंगे .सूतक काल लगने से पहले ही अपने देवी देवताओं की पूजा कर उनके पट बंद कर देना चाहिए. सूतककाल खत्म होने के बाद लोग मंदिर और पूजा घरों को फिर से खोलते हैं. मूर्तियों पर गंगाजल छिड़क कर उन्हें पवित्र किया जाता है और विधिवित पूजा पाठ पहले की तरह शुरू हो जाती है.

क्या है ग्रहण सूतककाल?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, किसी भी पूर्ण ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले और ग्रहण के 12 घंटे बाद का समय ग्रहण सूतककाल कहलाता है. मान्यता है कि इस दौरान मंदिरों में पूजा पाठ या कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता. सूतककाल समाप्त होने के बाद ही मंदिर खुलते हैं और लोग पूजा अनुष्ठान शुरू करते हैं.

इन देशों में भी रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव
21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत के अलावा साउथ अफ्रीका, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, कॉन्गो, इथोपिया, पाकिस्तान और चीन में भी दिखाई देगा. बताते चलें कि ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, इससे आंख पर बुरा असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण को आप नग्न आंखों से तो देख सकते हैं लेकिन सूर्य ग्रहण को नहीं. क्योंकि सूर्य ग्रहण से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर फिल्टर वाले चश्मों का प्रयोग करना चाहिए.

सावधानियां
सूर्य ग्रहण के दौरान लगने वाला सूतक काल ग्रहण लगने से 12 घंटे पूर्व ही प्रभावी हो जाता है, जो ग्रहण की समाप्ति के साथ खत्म होता है. इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है. विशेषकर गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए. ग्रहण काल में पूजा स्थल के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं ताकि ग्रहण का बुरा असर भगवान पर न पड़े. इस सूर्य ग्रहण के बाद स्नान, दान और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी रहेगा.

सूर्यग्रहण देखने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान:

  1. सूर्य ग्रहण के दौरान अक्सर लोग नंगी आंखों के सूरज को देखते हैं. ऐसा भूलकर भी न करें. यह आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है.
  2. अगर आपको सूर्यग्रहण देखना है तो इसके लिए सोलर फिल्टर चश्मे का इस्तेमाल करें.
  3. सोलर फिल्टर चश्मे को सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस भी कहते हैं.
  4. चश्मा न होने की स्थिति में सूर्य ग्रहण न देखें.
  5. सूर्यग्रहण के दौरान सूरज को पिनहोल, टेलीस्कोप या फिर दूरबीन से भी न देखें.

ग्रहण के दौरान क्या करें क्या नहीं
ग्रहण के दौरान खान-पान, शोर, शुभ कार्य, पूजा-पाठ आदि करना अच्छा नहीं माना जाता है. ग्रहण काल के दौरान गुरु मंत्र का जाप, किसी मंत्र की सिद्धी, रामायण, सूंदर कांड का पाठ, तंत्र सिद्धि आदि कर सकते हैं. ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान, शुद्धिकरण करके दान देना चाहिए. इस समय में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नही निकलना चाहिए. ग्रहण काल में सूर्य से पराबैंगनी किरणे निकलती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक होती हैं.

दिखाई देगी रिंग ऑफ फायर
21 जून को लगने वाले सूर्य ग्रहण में लोग रिंग ऑफ फायर देख सकते हैं. दरअसल, इस दौरान सूर्य का 88 फीसदी भाग चंद्रमा की वजह से दिखाई नहीं देगा. इस वजह से सूर्य के किनारे रिंग की तरह दिखाई देंगे. इसे ही रिंग ऑफ फायर कहते हैं. यह रिंग ऑफ फायर कुछ सेकेंड्स से लेकर कई जगहों पर 12 मिनट तक दिखाई देगा.

विश्व में उथल पुथल मचने के संकेत
माँ तारा ज्योति संस्थान के अनुसार मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जल तत्व की राशि मीन में स्थित होकर सूर्य बुद्ध चन्द्रमा और राहू को देखेंगे जो अशुभ संकेत हैं| संस्थान के अनिल मिश्रा ने कहा कि राहू और केतू तो हमेशा उलटी चाल ही चलते हैं तो इस दृष्टि से कुल 6 गृह वक्रीय रहेंगे, यह स्थिति पूरे विश्व में उथल पुथल मचाएगी|

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो समय समय पर होती रहती है| ज्योतिषियों द्वारा की जा रही भविष्यवाणियों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए और सकारात्मकता के साथ आने वाले समय में अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहिए| मानव ने प्रकृति के जीवन चक्र को तोड़ने एक प्रयास किया है जिसके फलस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं और अगर हमने समय रहते प्रकृति से छेड़छाड़ जारी रखी तो यह आपदाएं हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएँगी|

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