महिला पहलवानों को सलाम

आर्टिकल/इंटरव्यूमहिला पहलवानों को सलाम

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अमित बिश्नोई
पहलवानों और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष चल रहे दंगल के बीच कांग्रेस पार्टी ने इंट्री मारी है. कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले को प्रधानमंत्री को घेरा है. कांग्रेस पार्टी ओलम्पियन पहलवान विनेश फोगाट का एक फोटो ट्वीट करते हुए कहा है कि कोई इस तस्वीर को प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा दे. तस्वीर विनेश फोगाट की आंसुओं से भरी है. कांग्रेस ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि हमारी बेटियों का शोषण होता रहा और प्रधानमंत्री चुप्पी साधे रहे. क्यों.” कांग्रेस की इस टिपण्णी के राजनीतिक मायने कुछ भी हों लेकिन महिला पहलवानों ने भारतीय खेल संघों में चल रहे इस तरह के मामलों को जिस हिम्मत और हौसले के साथ उठाया है उसमें कम से कम मुझे तो कोई राजनीति नज़र आती.

यह अलग बात है कि भारत में हर मुद्दा चुनावी होता है या फिर बना दिया जाता है, मतलब यही हुआ कि भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा के गोंडा लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजभूषण सिंह के ऊपर लगे महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों का यह मामला भी अब राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है. इसकी शुरुआत बृजभूषण सिंह ने ही की थी, कांग्रेस का रिएक्शन तो बाद में आया है, चूँकि मामला ही कुछ ऐसा है कि विरोधियों को सरकार पर हमला करने का एक मौका मिला है. बृजभूषण सिंह ने पहले ही इस मामले को राजनीतिक साज़िश करार दिया है और आज उसका पर्दा फाश करने की बात भी कही है. दोपहर बाद वो आज एक पत्रकार वार्ता करने वाले हैं. उधर केंद्र सरकार मामले में बिगड़ती जा रही उसकी छवि को बचाने में जुटी हुई है और अब उसने इस काम में खेल मंत्रालय के अलावा विनेश फोगाट की पहलवान बहन और भाजपा नेता बबीता फोगाट को लगाया है. वो अब सरकार और पहलवानों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रही हैं.

इधर पहलवानों के तेवर से लगता नहीं कि वो पीछे हटने वाले हैं. वो अब आर पार की लड़ाई के मूड में हैं. विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों का यह कहना कि अब अगर चुप रहे तो भारत में खेलों के भविष्य विशेषकर महिला कुश्ती के लिए बहुत बुरा होगा। विनेश फोगाट का रोता हुआ चेहरा सोशल मीडिया पर वायरल हो चूका है. उनकी यह बात कि भारत में बेटियों को पैदा करना ही बंद कर देना चाहिए। विनेश की यह बात उस भाजपा सरकार के मुंह पर बहुत बड़ा तमाचा है जो बेटी बचाव की बात करती है. विनेश का यह कहना कि अगर यौन शोषण के सबूत पेश करने पड़े तो यह भारत के लिए एक काला दिन होगा हालंकि ज़रुरत पड़ने पर वो ऐसा करने को भी तैयार हैं.

केंद्र की मोदी सरकार को भी मालूम है कि मामला बहुत पेचीदा हो चुका है, अगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी तो इसका राजनीतिक रूप से बहुत नुक्सान हो सकता है और यही वजह है कि वो बृजभूषण सिंह पर इस्तीफे का दबाव डाल रही है, सरकार चाहती है कि हरियाणा के मामले की तरह इसमें भी बृजभूषण संदीप सिंह की तरह इस्तीफ़ा देकर अलग हो जाएँ। सरकार को अगर बृजभूषण को हटाने के लिए मज़बूर होना पड़ा तो यह एक गलत सन्देश जायेगा। सरकार अपनी फितरत के अनुसार अपने आपको को कमज़ोर या झुकने वाला नहीं दिखाना चाहती। बहरहाल महिला पहलवानों को सलाम जो उन्होंने सीधा संघ और सरकार से टक्कर ली है, अभी इसका नतीजा क्या होगा नहीं मालूम लेकिन खिलाडियों को जिस तरह से समर्थन मिल रहा है उससे यकीनन उनका हौसला ज़रूर बढ़ा है, सरकार पर भी दबाव है. विनेश, साक्षी और विशेषकर जो महिला पहलवान यौन शोषण का शिकार हुई हैं उन्होंने सिस्टम के खिलाफ आवाज़ उठाई, इसके लिए उनकी हिम्मत को सलाम तो बनता ही है.

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