प्रियंका गांधीः बोले तो इट्स डिफरेंट

 
प्रियंका गांधीः बोले तो इट्स डिफरेंट प्रियंका गांधीः बोले तो इट्स डिफरेंट

किसानों के अन्र्तमन तक पहुंचने में कामयाब हो रहीं हैं प्रियंका गांधी
किसी खास जाति या धर्म के नहीं, देश के किसानों को कर रहीं संबोधित

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी की महापंचायतों में उमड़ रही किसानों की भीड़ ने सत्तारूढ भाजपा के साथ सपा, रालोद और बसपा के खेमे में भी खलबली मचा दी है। किसानों के अपार समर्थन से मिल रही संजीवनी से कांग्रेस में एक नयी ऊर्जा का संचार हो गया है और कार्यकर्ता महापंचायतों को सफल बनाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहे हैं। लेकिन प्रियंका गांधी को मिल रहे समर्थन के पीछे उनकी किसानों को ध्यान में रखकर बनायी गयी रणनीति है जो आज प्रियंका गांधी और कांग्रेस को यूपी में अपार समर्थन दिला रही है। डिफरेंट लुक, डिफरेंट भाषण शैली, डिफरेंट रणनीति ने प्रियंका गांधी धर्म और जातिवादी नेताओं के बीच इट्स डिफरेंट बना दिया है।

‘जय जवान-जय किसान’ अभियान के अन्र्तगत कांग्रेस ने यूपी के 27 जिलों में कृषि कानूनों के विरोध में अभियान के तहत महापंचायत करने की रणनीति बनाई थी। बतौर वेस्ट यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने इस रणनीति को तैयार किया और कब और कहां महापंचायत का आयोजन करना है, किस तरह से खुद को जनता के सामने लाना है पर मंथन किया गया। महापंचायतों में किन मुद्दों को उठाया जाये कि किसानों के मन को छुआ जा सके इस पर विचार-विमर्श किया गया। वह समय था जब भाकियू से मिले समर्थन के बाद रालोद ताबड़तोड़ महापंचायतों को आयोजित कर रही थी तब प्रियंका गांधी और उनकी टीम शांत रहकर फूलप्रूफ रणनीति बनाने में जुटी हुई थी।

रणनीति तैयार होने के बाद प्रियंका गांधी ने अभियान की कमान संभाली और 9 फरवरी को सहारनपुर से किसान महापंचायतों की शुरुआत की। क्षेत्रीय जनता के मन को छूने के लिये उन्होंने महापंचायत को संबोधित करने से पूर्व शाकंभरी देवी मंदिर में पूजा की तो एक दरगाह पर भी गयीं। काला कुर्ता, भगवा गमछा पहले और माथे पर तिलक लगाये पंचायत को संबोधित करती प्रियंका ने क्षेत्र की जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी पूजा और वेशभूषा पर भाजपा ने कई तरह के सवाल भी उठाये मगर प्रियंका के इस लुक को जनता ने बेहद पसंद किया। और विपक्षियों के चलाये तीरों से बेपरवाह दिख रही प्रियंका गांधी किसानों से सीधा संवाद करने में जुटी रहीं। सहारनपुर के बाद मुजफ्फरनगर, बिजनौर और मथुरा और आज मेरठ के सरधना में महापंचायत को संबोधित करने वाली प्रियंका गांधी के गले में पड़ा गमछा अब उनकी पहचान बन गया है।

जाट-मुस्लिम नहीं, किसानों की बात कर रहीं प्रियंका

महापंचायतों को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी इस बात का बेहद ध्यान रख रही हैं कि अपने भाषणों में वह किसी जाति या धर्म के नहीं बल्कि देश के किसानों का ही जिक्र करें। जबकि बात करें रालोद की तो जयंत चौधरी जाट और मुस्लिम किसानो पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। नमक-लोटा लेकर सौगंध खिलाने से लेकर राकेश टिकैत के आंसूओं की बात कह वह जाट किसानों को रालोद के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। मगर प्रियंका गांधी एमएसपी से लेकर किसानों के बकाया तक का जिक्र कर किसानों का दर्द महसूस करने का अहसास दिला रहीं हैं। वहीं सीमा पर तैनात किसानों के बेटे और पीएम द्वारा किसानों के अपमान का जिक्र अपने भाषणों में करने वाली प्रियंका गांधी पीएम मोदी के खरबपति मित्रों पर भी जमकर निशाना साध रही हैं। वहीं पीएम मोदी के लिये 16 हजार करोड़ में खरीदे गये दो हवाई जहाजों की चर्चा करते हुए प्रियंका गांधी किसानो के बकाया 15 हजार करोड़ न चुकाये जाने की बात कह किसानों की दुखती रग पर हाथ रख देती हैं। वहीं कांग्रेस में हर वक्त और हर स्थिति में किसानों के साथ खड़े रहने की बात कह प्रियंका उनका समर्थन हासिल करने में कामयाब हो रही हैं।

आक्रमक भाषण शैली से मिली नयी पहचान

महापंचायत को संबोधित करने से पहले प्रियंका गांधी की वेशभूषा से लेकर उनके मंच पर आगमन और भाषण शैली पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सहारनपुर में जहां वह माथे पर टीका लगाकर मंच पर पहुंची तो आज सरधना में ट्रैक्टर पर सवार होकर महापंचायत स्थल तक पहुंचने वाली प्रियंका गांधी ने किसानों का मन मोह लिया। पूर्व में शांत स्वभाव की छवि को त्याग कर प्रियंका गांधी केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर अपनी आक्रामक भाषण शैली से जमकर निशाना साध रही हैं। वहीं उनमें दिखने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि से भी लोग प्रभावित हो रहे हैं। प्रियंका गांधी की महापंचायतों को मिले रहे समर्थन से साफ जाहिर हो रहा है कि यूपी में होने वाले चुनाव में कांग्रेस को बड़ी संजीवनी मिलने जा रही है।

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