कांग्रेस की चाणक्य प्रियंका गाँधी

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कांग्रेस की  चाणक्य प्रियंका गाँधी

सुनील शर्मा

जनवरी 1998 को तमिलनाडू के श्रीपेरुम्बुदूर में आयोजित राजनीतिक सभा सोनिया गांधी के राजनीतिक करियर की शुरूआत मानी जा रही थी। मगर उसी मंच पर मौजूद थीं उनकी बेटी प्रियंका गांधी जो 16 साल की उम्र से कांग्रेस को आगे ले जाने के कार्य में जुटी हुई थीं। रेड-ओरेंज रंग की साड़ी पहने आत्मविश्वास से भरपूर और अपनी मुस्कान से लाखों की भीड़ में अपनत्व का जादू बिखेरने वाली प्रियंका गांधी ने जब माइक संभाला तो उनको सुनने के लिये लोग बेताब थे। लाखों की भीड़ के बीच जब प्रियंका ने कहा, ‘‘एलोरम कांग्रेसिक्कु वोट पोडंगल (आप सब कांग्रेस को वोट दीजिए)’’ तो लोगों ने प्रियंका जिंदाबाद के नारे लगाकर एक नयी शुरूआत का ऐलान कर दिया। यह शुरूआत थी कांग्रेस के नये युग की, शुरूआत भी आजाद भारत में सबसे खराब समय से गुजर रही कांग्रेस के उबरने की, यह शुरूआत थी कांग्रेस के चाणक्य की जो 20 साल तक पर्दे के पीछे रहकर भी कांग्रेस को नयीं ऊंचाईयों तक ले जाती रही।

अपनी मां सोनिया गांधी के साथ खड़ी आत्मविश्वास से ओतप्रोत प्रियंका गांधी को देख लोगों को स्वयं इंदिरा गांधी के मंच पर खड़े होने का आभास हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उसी समय ऐलान कर दिया था कि अगले 50 सालों तक कांग्रेस को नेतृत्व की कमी नहीं होगी। अगले 20 साल तक सोनिया गांधी पार्टी की कमान संभालेंगी और उसके बाद प्रियंका इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाएंगी। उस समय गांधी परिवार की चाटुकारिता बतायी गयी यह बात सच साबित हुई और 2004 और 2009 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेेस ने लगातार सफलता हासिल कर सरकार बनायी। इसके ठीक 20 साल के बाद वर्ष 1999 में प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति में पदार्पण और जनता से मिल रहा अपार समर्थन यह इशारा कर रहा है कि आने वाले समय में पार्टी की कमान पूरी तरह से प्रियंका गांधी के हाथों में होगी। इन 20 साल में सक्रिय राजनीति से दूर रहकर भी प्रियंका गांधी कांग्रेस के लिये चाणक्य की भूमिका निभाती रहीं। आज कांग्रेस की चाणक्य, पार्टी के लिये स्टार प्रचारक बन चुकी हैं। वेस्ट यूपी में अपनी रैलियों से कांग्रेस को संजीवनी देने वाली प्रियंका गांधी को आज पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ता तक महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब सहित पूरे देश में स्टार प्रचारक के रूप में देखना चाहते हैं।

यूपी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहीं प्रियंका गांधी का बढ़ता प्रभाव उनकी रैलियों में जुट रही भीड़़ दर्शा रही है। उत्तर प्रदेश की जनता का दिल जीतने वाली प्रियंका गांधी का जादू अन्य प्रदेशों में भी असर दिखा रहा है। आसाम दौरे पर पहुंची प्रियंका गांधी ने अपनी विशिष्ट भाषण शैली और बिना लाग-लपेट विरोधियों पर निशाना साधने के अंदाज से वहां की जनता के दिल को छूने में सफलता हासिल की है। परिपक्व नेता की तरह वह देश भर में जा रही हैं और कांग्रेेस योद्धा बनकर हर लड़ाई का नेतृत्व कर रही हैं। लेकिन प्रियंका का कांग्रेस को आगे ले जाने का मिशन आज से नहीं बल्कि 16 साल की उम्र से जारी है। सक्रिय राजनीति से दूर रहकर प्रियंका गांधी कांग्रेस के लिये चाणक्य की भूमिका निभाती रहीं। अपनी मां सोनिया गांधी और अपने भाई राहुल गांधी की चुनावी रैलियों के आयोजन से लेकर मंच से उठाये जाने वाले मुद्दे तक प्रियंका गांधी के मार्गदर्शन में तय किये जाते रहे। 2012 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने रायबरेली और अमेठी में सक्रिय रहकर अपने मैनेजमेंट का लोहा मनवाया था। अपने वाकचातुर्य से बड़े-बड़े नेताओें को चुप्पी साधने पर मजबूर करने वाली प्रियंका की बातों का जवाब देना किसी के लिये भी बेहद मुश्किल है।

मात्र 16 साल की उम्र में अपना पहला राजनीतिक भाषण देकर प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के लिये चुनावी योद्धा की भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। 1999 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और अपने चाचा अरुण नेहरू के खिलाफ एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे आप से एक शिकायत है। मेरे पिता के मंत्रिमंडल में रहते हुए जिसनें गद्दारी की, भाई की पीठ में छुरा मारा, जवाब दीजिए, ऐसे आदमी को आपने यहां घुसने कैसे दिया? उनकी यहां आने की हिम्मत कैसे हुई?। प्रियंका गांधी का यह कहना वोटरों के दिल में उतर गया और जब प्रियंका ने कहा, दिल की बात आप से ना कहूं तो किसके पास कहने जाऊं? तो जनता लाजवाब हो गयी। यह प्रियंका का जादू था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रायबरेली आना भी बेअसर रहा और अरूण नेहरू को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 1999 में जब कर्नाटक के बेल्लारी से सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा तब चुनाव प्रचार की कमान संभालने वालीे प्रियंका गांधी ने भी बेल्लारी जाकर उनके लिए प्रचार किया और मां को जीत दिलाई।

2014 के लोकसभा चुनावों में भी प्रियंका गांधी ने सक्रिय भूमिका निभाई और कई मौकों पर उस समय संभावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लाजवाब कर दिया। जब उन्होंने कहा कि ‘कभी एबीसीडी, कभी आरएसवीपी, आप किसी प्राथमिक पाठशाला को तो संबोधित नहीं कर रहे हैं, देश की जनता में विवेक है।’ तो भाजपा के पास चुप होने के अलावा कोई मौका नहीं था। मोदी लहर के चलते कांग्रेस चुनाव जीत नहीं पाई मगर प्रियंका के रूप में कांग्रेस को एक ऐसा दमदार नेता जरूर मिला जो विपक्षी नेता की आंख में आंख डालकर बात कर सकता था। प्रियंका गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार की कमान भी अपने हाथों में रखी और उन्हें जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

करिश्माई व्यक्तित्व और दादी इंदिरा गांधी की तरह दिखने वाली प्रियंका गांधी ने 1999 में बतौर पूर्वी यूपी प्रभारी सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया तो विरोधी उनको कमजोर प्रतिद्वंदी मान रहे थे। मगर वर्तमान कांग्रेेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने किसान आंदोलन को लेकर रणनीति तैयार कर यूपी में महापंचायतों को संबोधित करना शुरू किया तो विपक्षियों के होश उड़ने शुरू हो गये। अपने खास अंदाज में विशिष्ट भाषण शैली में भाजपा सरकार पर सवाल उठाती प्रियंका गांधी ने देखते ही देखते किसानों से लेकर आम जनता में भी पैंठ बना ली है। जनता से सीधा संपर्क साधने में माहिर प्रियंका गांधी जब महिलाओं दादी-चाची-भाभी कहती हैं तो महिलाओं के हाथ उन्हें आशीर्वाद देने को स्वतः ही उठ जाते हैं। उनका जादू वेस्ट यूपी से इतर पूरे देश में असर दिखा रहा है। ऐसे में प्रियंका गांधी के हाथ में कांग्रेस की कमान आने और पार्टी के अच्छे दिन आने में देर नहीं लगेगी।

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