शाह बड़े या क्रिकेट

अब तो जैसी ज़रुरत वैसा नियम बनाने की परंपरा शुरू हो गयी.
 
शाह बड़े या क्रिकेट 
अमित बिश्‍नोई

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BCCI को दुनिया का सबसे ताकतवर बोर्ड कहा जाता है, ICC को भी कभी कभी उसके आगे नतमस्तक होना पड़ता है, बहुत से क्रिकेट प्लेइंग नेशंस इसे BCCI की दादागीरी भी कहते हैं। दुनिया के सबसे मालदार क्रिकेट बोर्ड में राजनेताओं का दबदबा पहले भी रहा है और अब भी है लेकिन थोड़ा बदला हुआ है. पहले राजनेता खुद ही बोर्ड के सर्वेसर्वा हुआ करते थे लेकिन अब उनकी औलादें सर्वे सर्वा बन गयी हैं, परिवारवाद का परिष्कृत रूप. यहाँ तक तो बात हज़म भी हो रही थी लेकिन बेटा पद पर बना रहे इसके लिए बोर्ड अपने नियम ही बदल डाले ऐसा कभी नहीं हुआ, दुसरे शब्दों में क्रिकेट की दुनिया में दादागिरी दिखाने वाला बोर्ड इतना निर्बल कभी नहीं दिखा। खैर नियम कानून तो अब देश में बीते दिनों की बात हो चुकी है. अब तो जैसी ज़रुरत वैसा नियम बनाने की परंपरा शुरू हो गयी. अपनी सुविधा के अनुसार। सुप्रीम कोर्ट ने भी हरी झंडी दिखाकर कह दिया सब चंगा सी. आप 2025 तक क्या 2050 तक बने रहो. सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का. अब तो भैंस भी मेरी है और लाठी भी मेरी। तो जैसी मेरी मर्ज़ी होगी हम वैसा ही करेंगे। आप भी सोच रहे होंगे कि किसकी बात हो रही है, तो बात देश के गृह मंत्री अमितशाह के सुपुत्र जय शाह की हो रही है जो भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड में सचिव की कुर्सी पर आसीन हैं. 

मामला उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्हें पद पर बरकरार रखने का है और इसके लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड अपने ही बनाये नियम में बदलाव कर रहा है जिसकी इजाज़त देश की सर्वोच्च अदालत ने भी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कल यानि बुधवार को BCCI के प्रस्तावित परिवर्तनों को मंज़ूर कर लिया, जिसका मतलब यह हुआ कि अब बोर्ड के वर्तमान चेयरमैन सौरव गांगुली और सचिव जय शाह के कार्यकाल को आसानी से विस्तार मिल जायगा। बता दें कि सौरव गांगुली और जय शाह दोनों का पहला कार्यकाल इस महीने की शुरुआत में बोर्ड के संविधान में ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ नियम के कारण खत्म हो गया था।    

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब बोर्ड में लगातार 6 साल यानि दो बार पद पर बने रहने पर तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड होगा। जिसका मतलब यह हुआ कि अब पदाधिकारियों के पास भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और किसी स्टेट एसोसिएशन में एक बार में ज़्यादा से ज़्यादा 12 साल का कार्यकाल हो सकता है। बात कितने वर्ष के कार्यकाल की नहीं है बात है कि नियमों में बदलाव के कारणों की. बोर्ड के यह दोनों पद प्रशासकीय हैं, क्या जय शाह को विस्तार देने के लिए नियम बदले गए हैं, जय शाह की योग्यता क्या है, क्रिकेट से उनका नाता कितना है, क्रिकेट की उनकी जानकारी कितनी है. बोर्ड के इस बर्ताव और उसपर सुप्रीम कोर्ट की मोहर को आप क्या कहेंगे? क्या इसे सत्ता या जय शाह की जीत कहेंगे या फिर क्रिकेट की हार. BCCI ने क्रिकेट की दुनिया में अपना मुकाम बड़ी मेहनत से बनाया है इसको उपहास का पात्र न बनायें तो अच्छा है.