यह संवेदनहीनता है या दुखद संयोग

आर्टिकल/इंटरव्यूयह संवेदनहीनता है या दुखद संयोग

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अमित बिश्नोई
देश में आजकल कुछ अजीब सा हो रहा है, कुछ बड़ी, अलग और वीभत्स घटना होती है तो उस तरह की घटनाओं की एक कतार लग जाती है. फिर वो चाहे निर्भया रेप कांड हो, श्रद्धा वालकर हत्याकांड हो या फिर सड़क पर घसीटते हुए लोगों की मौत का सिलसिला. पिछले दिनों दिल्ली के कंझावला इलाके में हुई एक युवती के साथ दर्दनाक हादसा हुआ, एक कार से टक्कर के बाद उसकी स्कूटी कार में फंस गयी और फिर उसमें फंसी युवती कई किलोमीटर तक घसीटी गयी और तब तक घसीटी गए जबतक उसके शरीर की चमड़ी नहीं उघड़ गयी और उसकी मौत नहीं हो गयी. पूरे देश में इस रौंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया, इसके बाद एक सिलिसिला शुरू हो गया.

इस घटना के अगले ही दिन ग्रेटर नॉएडा में पेरिफेरल एक्सप्रेवे पर एक युवती सर कुचली हुई लाश मिली, उसके साथ हकीकत में क्या हुआ अभी पता नहीं लग सका है। तीन जनवरी को खबर छपी कि उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बीटेक की एक छात्रा को एक कार ने कुचल डाला और उसे काफी दूर तक घसीटा भी, ये छात्रा वैंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। कल उत्तर प्रदेश के बाँदा से खबर आयी लखनऊ की एक महिला को जो स्कूटी पर सवार थी एक डम्पर ने टक्कर मारी, स्कूटी के साथ महिला भी डम्पर में फंस गयी. स्कूटी डम्पर के साथ रगड़ती रही और अंत में डम्पर में आग लग गयी और युवती भी स्कूटी के साथ जलकर राख हो गयी.

वहीँ अब नॉएडा से ही इसी तरह का एक केस और सामने आया है जिसमें एक स्वीगी डिलीवरी मैन की मौत हुई है. इस घटना में भी किसी कार ने भी फूड की डिलीवरी करने जा रहे डिलीवरी ब्वॉय को टक्कर मारी और फिर कार में फंसकर स्वीगी का यह डिलीवरी ब्वॉय 500 मीटर तक सड़क पर घिसटता रहा और फिर मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. इसी तरह जब दिल्ली में श्रद्धा वालकर की हत्या कर शरीर के 35 टुकड़े करने का मामला सामने आया. तब लगा यह अपने आप में एक अनोखा मामला है लेकिन फिर इसके बाद पूरे देश में इस तरह के कई मामले सामने आये जिसमें हत्या करने के बाद जिस्म के 35 से भी ज़्यादा टुकड़े किये गए, इसमें एक बेटे के हाथों अपने अपने बाप की हत्या के बाद उसके शरीर के टुकड़े कर बोरवेल में फेंके जाने. एक भतीजे के हाथों मौसी को मारकर उसके जिस्म के कई कई टुकड़े किये जाने का मामला शामिल है. इस तरह कम से कम सात आठ मामले सामने आये थे जो श्रद्धा वालकर जैसे घटना की हेडलाइन से मीडिया में सुर्खियां बने थे.

अगर आपको याद हो कि दिल्ली के निर्भया कांड के बाद भी उस समय कई मामले उसी तरह के सामने आये थे. कहने का मतलब सिर्फ यह है कि क्या अजीब संयोग नहीं है कि इस तरह का पहला जब कोई अलग मामला सामने आता है तो फिर लगातार कई मामले सामने आने लगते हैं. श्रद्धा वाल्कर कांड के बाद जब उस तरह 6 सात मामले सामने आये तो ऐसा लगने लगा कि इस तरह की घटनाएं अंजाम देने वाले किसी पैटर्न को फॉलो करने लगे हैं, या फिर मानसिक रूप से बीमार लोगों ने हत्या करने और उसे छुपाने का कोई नया तरीका अपनाया है लेकिन एक्सीडेंट के बाद किसी को कई किलोमीटर तक घसीटने का यह कौन सा चलन निकल पड़ा है. किसी एक्सीडेंट के बाद मौकाए वारदात से भाग जाना तो समझ में आता है लेकिन किसी इंसान को अपनी कार या किसी गाड़ी से बहुत दूर तक घसीटकर ले जाने की बात समझ से परे है. फिलहाल इस तरह की हो रही लगातार घटनाओं को हम संवेदनहीनता ही कह सकते हैं या फिर एक दुखद संयोग।

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