औकात के मुद्दे पर अब आगे बढ़ेगा गुजरात चुनाव

आर्टिकल/इंटरव्यूऔकात के मुद्दे पर अब आगे बढ़ेगा गुजरात चुनाव

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अमित बिश्‍नोई


गुजरात विधानसभा के चुनावी रण में कल प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गाँधी एक दूसरे को घेर रहे थे. अभी तक राहुल गाँधी के चुनावी अभियान से बाहर रहने की वजह से प्रचार अभियान में वो गर्मी नहीं देखी जा रही थी जो आम तौर पर देखि जाती है. कल दोनों नेताओं ने कई चुनावी रैलियां कीं और एक दूसरे पर परोक्ष रूप से निशाना भी साधा। गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कई चुनावी रैलिया कर चुके थे लेकिन उनके भाषणों में वो पैनापन, वो तंज़, कटाक्षों की वो भाषा नहीं थी जो उनके भाषणों में प्रायः देखी जाती है. लेकिन कल वो अपने पूरे तेवरों में नज़र आये, शायद यह राहुल फैक्टर की वजह से था .

दरअसल राहुल गाँधी प्रधानमंत्री मोदी का प्रिय विषय हैं, नाम भले ही वो कांग्रेस पार्टी का लेते हों लेकिन उनका मकसद राहुल गाँधी ही होते हैं, गाँधी परिवार ही होता है. कल राहुल गाँधी भारत जोड़ो यात्रा से ब्रेक लेकर गुजरात पहुंचे तो प्रधानमंत्री के भाषणों में वो पैनापन वापस लौट आया, ऐसा लगा उनमें एकदम से ऊर्जा का संचार हो गया हो . इधर राहुल गाँधी के गुजरात पहुँचने पर दूसरे कांग्रेसी नेता भी जोश में भर गए और शायद इसी जोश का नतीजा था कि मधुसूदन मिस्त्री जैसे नेता ने नरेंद्र मोदी की औकात को ललकार दिया। मधुसूदन इससे पहले भी मोदी को अक्सर काफी कुछ कहते रहते हैं, उनके मुंह से मोदी के लिए इस तरह की बातें निकलना कोई हैरानी वाली बात नहीं लेकिन मौका जब चुनाव का हो तो टीम मोदी ऐसे मुद्दों, ऐसी बातों, ऐसे बयानों, ऐसी भाषा को ढूंढती रहती है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो नेता छोटा है या बड़ा, बस वो कांग्रेसी होना चाहिए।

तो जनाब! मोदी जी को मिल गया अपने को प्रताड़ित बताने का मौका और गुजरात की जनता के बीच पहुँच गए वो औकात का मुद्दा लेकर। बताने लगे कि कितना प्रताड़ित हैं वो, कांग्रेसी उनकी औकात पूछ रहे हैं, अपनी औकात के मुद्दे को गुजरात की अस्मिता से जोड़ने में उन्हें देर नहीं लगी. उन्होंने गुजरात के लोगों को यह बताने में देर नहीं लगाईं कि दरअसल कांग्रेसी मेरी नहीं बल्कि आप लोगों की औकात को चैलेन्ज कर रहे हैं. यह अलग बात है कि मधुसूदन मिस्त्री भी एक गुजराती नेता हैं लेकिन कांग्रेसी हैं. गुजरात के चुनाव में यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है कि जब नरेंद्र मोदी की तरफ से विधवा प्रलाप किया गया हो. उनके चुनावी भाषणों और चुनाव बाद के भाषणों में ज़मीन आसमान का अंतर होता है, भले ही वो राजनीतिक भाषण ही क्यों न हों.

चुनाव बाद के भाषणों में वह कभी इस बात का ज़िक्र नहीं करते कि उन्हें विपक्षी विशेषकर कांग्रेसी कितनी गालियां देते हैं, गुजराती अस्मिता से उनका लगाव किसी अलमीरा में बंद हो जाता है. चुनाव बाद वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में नज़र आने लगते हैं लेकिन चुनाव के दौरान उनसे बड़ा प्रताड़ित देश में कोई और नेता नहीं होता। इस तरह के मुद्दों की तलाश में उनकी टीम हमेशा लगी रहती है कि कब कोई कांग्रेसी नेता पीएम मोदी के लिए चाय वाला, औकात वाला जैसा कोई बयान दे और वो उसे चुनावी मुद्दा बनाये। कांग्रेसी भी उन्हें इस तरह के मौके लगातार देते रहते हैं यह जानते हुए भी मोदी को ऐसे ही मुद्दों की तलाश रहती है. तो गुजरात के चुनाव में मोदी जी को उनका मनपसंद मुद्दा मिल गया, अब गुजरात चुनाव औकात के मुद्दे पर ही आगे बढ़ेगा, अगर कांग्रेसियों ने इस दौरान इसी तरह का कुछ और बयान न दिया तो.

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