विवादित शायर पर दांव कांग्रेस को पड़ेगा भारी!

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बुरे दौर का सामना कर रही कांग्रेस अब मुस्लिम वोट बैंक पर जमा रही निगाह
शायर इमरान प्रतापगढ़ी को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का चेयरमैन बनाया

अमित बिश्‍नोई

आजाद भारत की राजनीति में कांग्रेस पार्टी इन दिनों सबसे बुरे दौर का सामना कर रही है। हालिया पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार, अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी में चल रही अंदरूनी तकरार और प्रियंका गांधी के खुद यूपी के रणक्षेत्र में उतरने के बावजूद पंचायत चुनाव में आशातीत सफलता न मिलना कांग्रेस नेतृत्व को परेशान किये हुए है। असमंजस की स्थिति से आ गयी कांग्रेस ने अब शायर इमरान प्रतापगढ़ी को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का चेयरमैन बनाकर मुस्लिम वोटबैंक को अपने पाले में खिंचने का प्रयास किया है। कांग्रेस नेतृत्व भले ही यह कहे कि अल्पसंख्यक विभाग का चेयरमैन पहले भी मुस्लिम ही था मगर अपने पार्टी में मौजूद वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर एक विवादित शायर को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना कांग्रेस के लिये भी मुश्किल हालात पैदा कर सकता है।

गौरतलब है कि ‘बापू का कातिल कौन है, इंदिरा का कातिल कौन है, राजीव को किसने कत्ल किया, इस पर संसद क्यूं मौन है’ गाकर चर्चा में आये शायर इमरान प्रतापगढ़ी की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ भाजपा और मोदी विरोध कर मुस्लिमों को एकजुट करना है। इमरान की राजनीतिक पुष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने मुरादाबाद से लोकसभा चुनाव जोर-शोर से लड़ा मगर उनको सुनने आये लोगों को वोट में तब्दील करने में इमरान नाकाम रहे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन अनुच्छेद 370, राम मंदिर, एनआरसी और सीएएए जैसे मुद्दों को लेकर मुस्लिम समाज की भाजपा से नाराजगी जगजाहिर है। ऐसे में नाराज मुस्लिमों की भावनाओं को आंदोलित कर अपने पक्ष में करने के लिये कांगे्रस ने वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर एक शायर पर बड़ा दांव खेला है।

मगर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को चेयरमैन बनाकर कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जरिए मुस्लिमों को साधने का प्रयास खुद कांग्रेस के लिये उल्टा पड़ सकता है। क्योंकि इमरान प्रतापगढ़ी अपनी कविता-शायरियों में भाजपा-मोदी के खिलाफ जहर उगलते हुए हिंदूओं पर भी विवादित बयानबाजी करने से पीछे नहीं हटते। ऐसे में कांग्रेस भले ही उन्हें पार्टी का औवेसी समझकर आगे लायी हो मगर इमरान की विवादित बयानबाजी करने की आदत से कांग्रेस के साथ जुड़ा हिंदू वर्ग छिटक कर भाजपा की ओर भी जा सकता है। अब यदि इमरान अपने तेवर ढीले करेंगे तो पार्टी के लिये बेमानी साबित होंगे। लेकिन वह पहले की तरह आक्रामक बयानबाजी करते रहे तो कांग्रेस के लिये भस्मासुर भी बन सकते हैं। यह दांव चलकर मुस्लिम वोट बैंक पर निगाह जमाने वाली कांग्रेस अपने हिंदू वोट बैंक को गंवा भी सकती है।

गौरतलब है कि आजाद भारत की राजनीति में शीर्ष पर रहने वाली कांग्रेस ने सबसे अधिक समय तक देश पर शासन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु के बाद सोनिया गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाने वाली कांग्रेस सत्ता जाते ही असमंजस की स्थिति में आ गयी। पार्टी नेतृत्व के कई निर्णय खुद के खिलाफ गये और कांग्रेस अपनी नीतियों को निर्धारित करने और उन्हें क्रियान्वित करने में नाकाम साबित हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाना खुद पार्टी को ही नुकसान पहुंचा गया। कई हार के बावजूद पार्टी ने खुद को बदलने की कोशिश नहीं की और राहुल गांधी पर जबरन भरोसा जताये रखा। यही वजह रही कि कांग्रेस पदाधिकारियोें से लेकर आम कार्यकर्ता तक की मांग को अनसुना कर प्रियंका गांधी को पार्टी में कोई बड़ा पद नहीं सौंपा गया। उत्तर प्रदेश की महासचिव बनने के बाद भी प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी को ही आगे बढ़ाती दिखी जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई। यही कारण था कि यूपी में हुए पंचायत चुनाव की बागडोर खुद संभालने और ताबड़तोेड़ रैली, महापंचायतों को संबोंधित करने के बावजूद प्रियंका गांधी पार्टी को पुर्नजीवित करने में नाकाम रहीं।

हालिया पांच राज्यों में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी की यह नीति समझ से परे थी की केरल में वह वाम मोर्चा के खिलाफ चुनाव लड़ी तो बंगाल में वाम मोर्चा के साथ। नतीजा बिल्कुल विपरित निकला और बंगाल में जहां ममता बनर्जी ने सरकार बनायी वहीं केरल में वाम मोर्चा ने विजयी पातका फहराने में कामयाबी हासिल की। दोनों जगहों पर अपना सर्वस्व झोंक देने के बावजूद पार्टी के हाथ कुछ भी नहीं आया।

शायर इमरान प्रतापगढ़ी को लेकर पार्टी नेतृत्व की सोच भी कहीं पार्टी अध्यक्ष पद और केरल-बंगाल जैसी गलती को दोहराने वाली साबित न हो। गौरतलब है कि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिसमें हिंदूवादी छवि को लेकर भाजपा चुनावी मैदान में उतरेगी। ऐसे में इमरान प्रतापगढ़ी और औवेसी जैसे नेताओें की अर्नगल बयानबाजी से भाजपा को ही फायदा होगा। हिंदूओं के मन में मुसलमानों के हावी होने का खौफ पैदा कर चुकी भाजपा इन नेताओं की विवादित बयानबाजी का लाभ उठाकर हिंदूूओं को एकजुट कर अपने पाले में खिचने का प्रयास करेगी। और इमरान प्रतापगढ़ी के पूर्व में दिये गये बयानों को देखें तो लगता नहीं की वह अपनी विवादित छवि को बदलने का कोई प्रयास करेंगे। ऐसे में कांग्रेस का यह दांव उत्तर प्रदेश में चौतरफा विरोध का सामना कर रही योगी सरकार को संजीवनी देने वाला भी साबित होे सकता है।

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