‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’

 
‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’ ‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’
  • 82 के हुए नेता जी सपा कार्यकताओं ने धूमधाम से मनाया जन्मदिन

पूर्व रक्षा मंत्री, सपा संरक्षक व तीन बार के यूपी सीएम रह चुके मुलायम सिंह यादव उर्फ नेताजी का आज 82 जन्मदिन है। यूपी के साथ पूरे देश में अपना जलवा दिखाने वाले ऐसे धुरंधर नेताओं में से एक है। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में मुलायम सिंह ने साहसिक योगदान किया। मुलायम सिंह की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में मुलायम सिंह यादव को प्यार से नेता जी कहा जाता है। इटावा जिले के सैफई गाँव में किसान परिवार में जन्मा यह शख्स किसी के ज़ेहन में नहीं था,कि साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश और देश की सियासत में एक बड़ी पहचान बनायेगा। समाजवादी पार्टी और कुनबे के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया।

नेताजी के शुरूआती जीवन से लेकर राजनीति सफर तक के कुछ मुख्य अंश………

1 – पिता पहलवान बनाने चाहते थे

‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’

मुलायम सिंह की शुरूआती पढ़ाई-लिखाई इटावा, फतेहाबाद और आगरा में हुई। मुलायम सिंह यादव अपने पाँच भाई-बहनों में रतनसिंह यादव से छोटे व अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल सिंह यादव और कमला देवी से बड़े हैं। पिता सुधर सिंह यादव उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे । मुलायम सिंह यादव को छात्र जीवन मे पहलवानी का बेहद शौक था। वे कॉलेज की ओर से आगरा कुश्ती टीम के कप्तान बन कर गये और जीत करके वापस लौटे। किन्तु पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु नत्थूसिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

2 – छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में राजनैतिक पारी की शुरूआत

साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश और देश की सियासत में एक बड़ी पहचान बनायी। यूपी के इटावा में केके कॉलेज में खेत- खलिहान की राजनीति के जरिये देश की शीर्ष राजनेताओं में सुमार होने वाले समाजवादी जननायक मुलायम सिंह यादव ने छात्र संध अध्यक्ष के रूप मे अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत यहीं से की । इसी कॉलेज में 1961 में मुलायम सिंह यादव ने स्नातक की शिक्षा में हासिल की थी। जैन इन्टर कालेज करहल (मैनपुरी) से बी0 टी0 की शिक्षा हासिल की। इसके बाद कुछ दिनों तक इन्टर कालेज में अध्यापन कार्य भी किया। मुलायम सिंह यादव ने साल 1954 में सिर्फ 15 साल की उम्र में नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के आह्वान पर नहर रेट आन्दोलन में भाग लिया और पहली बार जेल गए थे। साल 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए।

3 – बीस साल छोटी साधना से किया मोहब्बत का इजहार

‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’

1982 में जब मुलायम लोकदल के अध्यक्ष बने । साधना पार्टी में एक कार्यकर्ता की हैसियत से काम कर रही थीं। बेहद खूबसूरत और तीखे नैन-नक्श वाली साधना पर जब मुलायम की नजर पड़ी तो वे भी बस उन्हें देखते ही रह गए। पहली ही मुलाकात में नेताजी अपने से 20 साल छोटी साधना को अपना दिल दे बैठे। मुलायम पहले से ही शादीशुदा थे और साधना भी।

1988 में साधना ने एक पुत्र प्रतीक यादव को जन्म दिया। कहते हैं 90 के दशक में जब मुलायम मुख्यमंत्री बने तो धीरे-धीरे बात फैलने लगी कि उनकी दो पत्नियां हैं, लेकिन वह इतने ताकतवर नेता थे कि किसी की मुंह खोलने की हिम्मत ही नहीं पड़ती थी। अखिलेश यादव ने साधना गुप्ता के अपने परिवार में एंट्री के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार माना। तभी से अखिलेश अमर सिंह से चिढ़ने लगे थे। वह मानते हैं कि साधना गुप्ता और अमर सिंह के चलते उनके पिताजी उनकी मां के साथ न्याय नहीं किया।

4 – 1992 लखनऊ में समाजवादी पार्टी की स्थापना

मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में 4 – 5 नवंबर 1992 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की स्थापना की । भारत के राजनीतिक इतिहास की यह एक क्रान्तिकारी घटना थी, आपातकाल में वो 19 महीने जेल में रहे। अक्टूबर 1992 में देवरिया के रामकोला में गन्ना किसानों पर पुलिस फायरिंग के खिलाफ चलाए गए किसान आन्दोलन सहित विभिन्न आन्दोलनों में 9 बार इटावा, वाराणसी और फतेहगढ़ आदि जेलों में रहे । 1993 में हुए विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी का गठबंधन बीएसपी से हुआ। हालांकि, यह मोर्चा जीता नहीं और भारतीय जनता पार्टी भी सरकार बनाने से चूक गई। मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस और जनता दल दोनों का साथ लिया और फिर मुख्यमंत्री बन गए। प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और इन्द्र कुमार गुजराल की सरकारों में उन्होंने 1996 से 1998 तक भारत के रक्षामंत्री का पदभार संभाला ।

5 – कोरोना की चपेट में आये

‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’

मुलायम सिंह यादव 14 अक्टूबर को कोरोना वायरस की चपेट में आ गये थे। नेता जी का स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं है। इसी कारण वह अपने घर में ही सीमित हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव को फोन करके बधाई दी। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के स्वास्थ्य का हाल लेने के साथ उनके दीर्घायु होने की कामना की।