Nitin Desai Suicide : आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने की आत्महत्या

एंटरटेनमेंटNitin Desai Suicide : आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने की आत्महत्या

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इंडस्ट्री से दिल तोड़ने वाली खबर सामने आ रही है। मशहूर प्रोडक्शन डिजाइनर नितिन देसाई ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह डिप्रेशन से पीड़ित थे। नितिन देसाई के निधन पर विधायक महेश बाल्दी ने विधानसभा में कहा कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. नितिन एक अभिनेता, फिल्म निर्माता, कला डिजाइनर, सेट डिजाइनर और प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में प्रसिद्ध रहे हैं। उनकी लोकप्रियता और काम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्मों में काम करने के साथ-साथ उन्होंने एनडी स्टूडियो की भी स्थापना की।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘ई-टाइम्स’ के मुताबिक, 58 साल की उम्र में नितिन देसाई ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्होंने मुंबई के पास कर्जत स्थित अपने स्टूडियो में आत्महत्या कर ली। उन्होंने निर्देशक और कला निर्देशक के रूप में उद्योग में 20 साल बिताए। विधु विनोद चोपड़ा, राजकुमार ईरानी, संजय लीला भंसाली से लेकर आशुतोष गोवारिकर तक के साथ काम किया था।

नितिन देसाई एक अभिनेता और निर्देशक भी थे

नितिन चंद्रकांत देसाई ने न केवल प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में काम किया बल्कि कई फिल्मों में अभिनय और निर्देशन भी किया। उन्होंने ‘हम सब एक हैं’, ‘दाऊद: फन ऑन द रन’ और ‘हैलो जय हिंद’ जैसी कुछ परियोजनाओं में अभिनेता के रूप में काम किया। वहीं, उन्होंने साल 2011 में फिल्म हैलो जय हिंद का निर्देशन भी किया। फिर उन्होंने साल 2012 में मराठी फिल्म ‘अजिंता’ के निर्देशन की कमान संभाली।

नितिन देसाई फिल्में

कला निर्देशक के रूप में नितिन देसाई मूवीज को काफी प्रसिद्धि मिली। वह 1989 से इस क्षेत्र में काम कर रहे थे। उन्होंने कई सारी फिल्मों में आर्ट डायरेक्टर के रूप में काम किया है उनमे से ‘विजेता’ , ‘वन 2’ का 4, ‘इश्क’ , ‘परिंदा’, ‘आ गले लग जा’, ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘दिलजले’, ‘माचिस’, ‘लगान”, ‘जंग’ ‘, ‘मिशन कश्मीर’, ‘राजू चाचा’, ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘दोस्ताना’, ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’, ‘देवदास’, ‘द लीजेंड’ उन्होंने ‘भगत सिंह’, ‘पानीपत’ जैसी सुपरहिट फिल्में है ।

नितिन चंद्रकांत देसाई राष्ट्रीय फिल्म

वैसे, नितिन देसाई ने अपने शानदार करियर में कई पुरस्कार जीते। लेकिन वह एक ऐसे कला निर्देशक थे जिन्होंने एक नहीं बल्कि चार-चार राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे. उन्हें पहला राष्ट्रीय पुरस्कार फिल्म ‘डॉ.’ के लिए मिला था। साल 1999 में ‘बाबासाहेब अंबेडकर’ के लिए, फिर ‘हम दिल दे चुके सनम’ के लिए दूसरी और ‘लगान’ के लिए तीसरी और ‘देवदास’ के लिए चौथी।

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