ज्वेलिन थ्रो स्पर्धाओं में अपनी बादशाहत कायम करने वाले भारत के नीरज चोपड़ा जो नहीं कर सके, उन्हें फॉलो करने वाले पाकिस्तान के अरशद नदीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में वो कर दिखाया और 90 मीटर से ज़्यादा भाला फेंककर गोल्ड मैडल हासिल किया। बता दें कि टोक्यो ओलम्पिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा अभी तक 90 मीटर का मार्क पार नहीं कर पाए हैं, उन्होंने हाल ही में डायमंड लीग में 89.94 मीटर का थ्रो फेंक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. बता दें कि नीरज चोपड़ा ने इंजरी की वजह से राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लिया जिसका मनोवैज्ञानिक फायदा पाकिस्तानी ज्वेलिन थ्रोअर को मिला। अरशद नदीम ने 90.18 मीटर का थ्रो करके खिताब अपने नाम किया. नदीम ने अपने 5वें थ्रो में इस मार्क को हासिल कर लिया. यह मुकाम हासिल करने अरशद नदीम उपमहाद्वीप के पहले जैवलिन थ्रोअर बन गए हैं.
इस स्पर्धा का रजत पदक वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स को मिला जिन्होंने 88.64 मीटर के थ्रो के साथ दूसरा स्थान हासिल किया. बता दें कि अरशद नदीम और नीरज चोपड़ा के बीच अक्सर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलता है. दोनों ही ज्वेलिन थ्रोअर अच्छे दोस्त भी हैं. नदीम नीरज को अपना आदर्श मानते हैं और कई बार ऐसा भी हुआ कि उन्होंने नीरज के ज्वेलिन का इस्तेमाल किया मगर वह भारतीय ज्वेलिन थ्रोअर को कभी पछाड़ नहीं सके. इसबार जब उन्होंने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की तो उसमें नीरज की मौजूदगी नहीं थी, यकीनन इसका उन्हें अफ़सोस ज़रूर हुआ होगा.
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टोक्यो ओलिंपिक में अरशद ने 84.62 मीटर का थ्रो फेंका था और 5वें स्थान पर रहे थे. वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 86.16 मीटर के थ्रो के साथ अपने प्रदर्शन को सुधारा हालाँकि वहां भी वह 5वें स्थान पर रहे. लेकिन अरशद ने हिम्मत नहीं हारी और अपने प्रदर्शन में सुधार की प्रक्रिया जारी रखी जिसका नतीजा उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में मिला और उन्होंने वो कारनामा कर दिखाया जो उनके आदर्श नीरज चोपड़ा भी अबतक नहीं कर पाए.
