चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर आंध्र प्रदेश से लेकर ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और झारखंड समेत देश के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण पेड़ उखड़ गए, बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और कई इलाकों में पानी भर गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान अर्नब बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के नरसापुर के पास तट से टकराया। लैंडफॉल के दौरान अधिकतम लगातार हवा की रफ्तार 125 से 135 किमी प्रति घंटा रही, जबकि झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुंचे।
आंध्र प्रदेश में भारी बारिश, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा
चक्रवात का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिल रहा है।
पोलावरम, काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, एलुरु, NTR और कृष्णा जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं दर्ज की गई हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार के मुताबिक, 290 राहत शिविर बनाए गए हैं और 84,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए हैं। सड़कें अवरुद्ध हुई हैं और बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है।
निचले इलाकों में समुद्री पानी भरने का खतरा
IMD ने आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय इलाकों में समुद्री लहरों के सामान्य स्तर से ऊपर उठने की चेतावनी दी है।
काकीनाडा और यनम के आसपास निचले तटीय क्षेत्रों में storm surge के कारण पानी भरने का खतरा अधिक बताया गया है।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से घरों के अंदर रहने को कहा गया है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश का खतरा
चक्रवात अर्नब के आगे बढ़ने और कमजोर होने के बावजूद उसका व्यापक सर्कुलेशन पूर्वी और मध्य भारत में भारी बारिश करा सकता है।
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में 28 और 29 अक्टूबर को बारिश का असर सबसे ज्यादा रहने की संभावना है।
दक्षिण ओडिशा के कई जिलों में पहले से भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।
तेलंगाना, झारखंड और मध्य प्रदेश तक पहुंचेगा असर
28 अक्टूबर को तेलंगाना और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
इसके बाद चक्रवात का अवशेष उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और झारखंड में बारिश बढ़ा सकता है।
29 अक्टूबर को झारखंड और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश की आशंका है।
छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। कुछ इलाकों में हवा की गति 60-70 किमी प्रति घंटा और झोंके 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।
बिहार में 29 और 30 अक्टूबर को भारी बारिश
चक्रवात कमजोर होकर अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ने के बाद बिहार के मौसम को भी प्रभावित करेगा।
IMD के अनुसार, बिहार के कुछ हिस्सों में 29 और 30 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
इसके साथ गरज-चमक और तेज हवा चलने की भी संभावना है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी 29-30 अक्टूबर के दौरान बारिश बढ़ सकती है।
दिल्ली-NCR में भी बदलेगा मौसम
दिल्ली, हरियाणा और आसपास के उत्तर-पश्चिमी राज्यों के मौसम पर चक्रवात के साथ सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली-NCR में 29 और 30 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।
हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में भी अलग-अलग स्थानों पर बारिश हो सकती है।
उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में गरज-चमक तथा 30-40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
चक्रवात अर्नब के कारण आंध्र प्रदेश में जनजीवन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
Reuters के मुताबिक, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में मिलाकर 1.8 लाख से अधिक लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। कई जगह मकानों को नुकसान पहुंचा है, पेड़ उखड़े हैं, सड़कें बाधित हुई हैं और बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।
विशाखापत्तनम समेत तटीय क्षेत्र में विमान सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं और कुछ हवाई अड्डों पर परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
लैंडफॉल के बाद कमजोर होगा अर्नब
IMD के मुताबिक, तट पार करने के बाद चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर होगा।
28 अक्टूबर की शाम तक हवा की रफ्तार घटकर करीब 70-80 किमी प्रति घंटा, झोंकों के साथ 90 किमी प्रति घंटा रह सकती है। 29 अक्टूबर की सुबह तक इसके और कमजोर होकर 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाले सिस्टम में बदलने की संभावना है।
हालांकि चक्रवात की हवा कमजोर होने का मतलब खतरा पूरी तरह खत्म होना नहीं है। इसका अवशेष अगले कुछ दिनों तक छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश करा सकता है।
मौसम विभाग ने प्रभावित राज्यों के लोगों से स्थानीय प्रशासन और IMD की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने और जलभराव वाले इलाकों तथा तेज बहाव वाली नदियों और नालों से दूर रहने की सलाह दी है।
