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UP News : सेना कोर्ट ने मानेन्द्र कुमार सिंह को बढ़ी हुई दर पर वेतन का एरियर और पेंशन देने का आदेश दिया

लखनऊ l सेना से रिटायर हुए लखनऊ निवासी पूर्व आनरेरी नायब सूबेदार को सेना कोर्ट ने प्रमोशन की पेंशन देने का आदेश सुनाया। नायब सूबेदार मानेन्द्र कुमार सिंह की नौकरी को 26 साल का मानते हुए कोर्ट ने आदेश दिया।

 मानेन्द्र कुमार सिंह सन 1990 में सेना की सिग्नल कोर में भर्ती हुआ और 26 वर्ष की सेवा के बाद वर्ष, 2016 रिटायर हुआ l रिटायर्मेंट के बाद उसे मालूम हुआ कि जूनियर चंचल सिंह उससे अधिक पेंशन पा रहा है, उसके बाद उसने कई अपील और प्रार्थना-पत्र दिए लेकिन उसे नकारते हुए खारिज कर दिया गया l

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 मानेन्द्र कुमार सिंह निराश होकर सशत्र-बल अधिकरण लखनऊ के अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय के माध्यम से वाद दायर किया जिसमे सर्विस से संबंधित पुस्तकों की मदद यादव बुक कंपनी के वीरेंद्र कुमार यादव ने की जिसके आधार पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विजय पाण्डेय ने याची का पक्ष रखते हुए दलील दी कि, सूबेदार चित्तर सिंह, ध्यान सिंह, इंजीनियर गुरचरन सिंह ग्रेवाल, कमिश्नर और सेक्रेटरी हरियाणा सरकार और पी०जगदीश के मामले में इसका निर्धारण हो चुका है कि जूनियर, सीनियर से अधिक न तो वेतन पा सकता है न पेंशन लेकिन याची के मामले में इसके विपरीत व्यवहार किया जा रहा है l याची अपनी पूरी सर्विस जूनियर से कम सैलरी में की और रिटायर्मेंट के बाद कम पेंशन भी पा रहा है, जो न्यायपूर्ण नहीं है l  

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याची के अधिवक्ता ने खण्ड-पीठ के सामने दलील दी कि जूनियर रु. 44900/- पेंशन पा रहे हैं और याची रु.43600/- ही पेंशन पा रहा है जबकि, एम०ए०सी०पी०/ए०सी०पी० का लाभ उसे सर्विस के दौरान ही मिलना था लेकिन, नहीं दिया गया l 

भारत सरकार रक्षा-मंत्रालय द्वारा इसका जोरदार विरोध किया गया लेकिन, न्यायमूर्ति उमेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं वाईस एडमिरल अभय रघुनाथ कार्वे की खण्ड-पीठ ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि याची को 1 अप्रैल, 2008 से 2016 तक एम०ए०सी०पी०/ए०सी०पी० का लाभ देकर वेतन का एरियर और 2016 के बाद उसी आधार पर पेंशन चार महीने के अंदर दी जाए अन्यथा की स्थिति में आठ प्रतिशत व्याज भी याची को देना होगा l

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