नई दिल्ली। मणिपुर में भीषण बारिश की वजह से काफी जानमाल की हानि हो रही है। आज भूस्खलन की चपेट में एक आर्मी कैंप आ गया। जिससे कैंप के सात जवानों की मौके पर ही मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लगातार भारी बारिश के कारण हालात काफी खराब हो गए हैं। भूस्खलन की चपेट में आने से आम लोगों के साथ ही सेना को भी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही बारिश में हुए भूस्खलन के में आर्मी का एक टेरिटोरियल कैंप आ गया। जिसमें काफी जानमाल की हानि बताई जा रही है।
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हालांकि अभी सेना ने इस पूरे मामले का खुलासा नहीं यिका घटना तुपुल रेलवे स्टेशन के पास बताई जा रही है। सेना के सूत्रों के मुताबिक अभी तक सात सैनिकों के शव बरामद हो चुके हैं। भूस्खलन के मलबे में अभी तक 45 से अधिक जवान दबे हुए हैं। रेलवे के अनुसार अब तक 19 जान बचाई जा चुकी है। मलबा गिरने के चलते इजेई नदी भी अवरुद्ध हो गई। जिससे जलाशय बन गया है जो निचले इलाकों को अपने आगोश में समेट सकता है।
नोनी के डिप्टी कमिश्नर ने एक एडवाइजरी जारी की है। जिसमें कहा है कि टुपुल रेलवे निर्माण शिविर में दुर्भाग्यपूर्ण भूस्खलन में 50 से अधिक लोग अंदर दब गए हैं। जबकि दो लोगों के शव अभी तक बरामद हुए हैं। इजेई नदी का प्रवाह मलबे से बाधित हो रहा है। भंडारण की स्थिति भयावह हुई तो जिला मुख्यालय के निचले इलाकों में भारी तबाही होगी।
जानकारी के अनुसार जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने के लिए रेलवे लाइन का निर्माण किया जा रहा है। इसकी सुरक्षा में 107 टेरिटोरियल आर्मी के जवान तैनात हैं। वहां पर भारी भूस्खलन हुआ। जिसमें कई जवान दब गए। आज गुरुवार को सुबह सेना, असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस ने बड़े पैमान पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जिसमें इंजीनियरिंग उपकरणों का उपयोग किया है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना पर जानकारी देते हुए लिखा कि मणिपुर में तुपुल रेलवे स्टेशन के समीप भूस्खलन के मद्देनजर मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी बात की है। इस समय बचाव कार्य जोरों पर है। एनडीआरएफ की टीम मौके पर है।
