तौकीर सिद्दीकी
हरियाणा विधानसभा चुनाव में पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस विरोधी पार्टियों और गठबंधनों की दिलचस्पी कांग्रेस की दलित नेता कुमारी शैलजा में अचानक बढ़ गयी है. इस दिलचस्पी का पहला संकेत भाजपा की तरफ से आया और हरियाणा में 9 सालों तक राज चलाने वाले मनोहर लाल खट्टर ने कुमारी शैलजा को भाजपा में आने का ऑफर दे दिया, इसके बाद बारी अपने को दलित समुदाय का मसीहा बताने वाली बसपा प्रमुख मायावती की थी. उन्होंने भी मौके पर चौका मारने की कोशिश की और कांग्रेस पर कुमारी शैलजा को लेकर एक बड़ा आरोप लगा दिया। मायावती ने कांग्रेस को जातिवादी पार्टी बताते हुए अवसरवादी बता दिया और कहा उसे सिर्फ बुरे समय में दलितों की याद आती है. हालाँकि मायावती की इस बात से कहीं न कहीं ये बात स्पष्ट होती है कि हरियाणा में कांग्रेस पार्टी अच्छी पोजीशन में है.
ये बात मैं इसलिए कह रहा हूँ कि इन दिनों कुमारी शैलजा नाराज़ चल रही हैं और फिलहाल चुनावी अभियान से दूर हैं. मायावती के कहने का मतलब यही है कि कांग्रेस को इस वक्त दलित नेताओं और दलित वोटों की ज़रुरत नहीं है और इसीलिए कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा में पार्टी के दलित चेहरे कुमारी शैलजा को किनारे कर दिया है. हालाँकि नाराज़गी की बात सच होने के बावजूद कुमारी शैलजा की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है जिससे ये लगे कि वो बगावत के मूड में हैं. कुमारी शैलजा के करीबी भी इस बात से इंकार करते हैं, उनका कहना है कि जो बातें राजनीतिक हलकों में चल रही हैं या फिर अफवाहे फैलाई जा रही हैं वो निराधार हैं क्योंकि हमारी नेता ने तो हमसे अपने क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों के लिए जमकर मेहनत करने का निर्देश दिया है, वो भी जल्द ही खुद भी चुनावी अभियान में उतरेंगी। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कुमारी शैलजा की नाराज़गी कोई नई बात नहीं है, ऐसा हर चुनाव में होता है लेकिन जब केंद्रीय नेतृत्व चुनावी अभियान में उतरता है तो शैलजा पार्टी के मंचों पर फिर दिखाई देने लगती हैं।
जहांतक हरियाणा चुनाव में केंद्रीय नेताओं के उतरने की बात है तो पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आज से चुनावी अभियान शुरू कर रहे हैं, उनकी आज अम्बाला सिटी और घरौंडा में चुनावी सभाएं है, जल्द ही राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के भी चुनावी कार्यक्रम लगेंगे। अमरीका के दौरे से लौटने के बाद राहुल गाँधी सबसे पहले हरियाणा ही पहुंचे थे, हालाँकि वो कोई चुनावी कार्यक्रम नहीं था लेकिन उनके बीस मिनट के इस कार्यक्रम से हरियाणा के वोटरों में इतना बड़ा सन्देश गया जो कई चुनावी सभाओं से बड़ा था. राहुल ने अमरीका के दौरे पर हरियाणा के युवक अमित से मुलाकात की थी जो एक एक्सीडेंट में घायल हो गया था, राहुल ने उससे वादा किया था कि भारत लौटने पर वो उसके घर जायेंगे और उनके परिवार से मुलाकात कर अमित के हालात शेयर करेंगे, राहुल ने विदेश से लौटते ही अपना वादा पूरा किया जिसने समाचार माध्यमों में काफी सुर्खियां बटोरी। एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक राहुल के इस संक्षिप्त से दौरे ने हरियाणा में कांग्रेस के लिए बह रही हवा को और तेज़ कर दिया है.
इधर भाजपा और दूसरे विरोधी दल कांग्रेस की इस हवा को रोकने या फिर उसका रुख बदलने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं मगर न तो भाजपा और न दूसरी अन्य पार्टियां किसी तरह का नैरेटिव बना पा रही हैं. ऐसे में जब अपने से कुछ नहीं हो पा रहा है तो दूसरे के घरों में झांककर कोई मुद्दा हासिल करने की कोशिशें हो रही हैं. यहाँ पर बता दें कि हरियाणा से जो ख़बरें आ रही है वो यही बता रही हैं कि इस बार मुकाबला सत्ताधारी भाजपा से नहीं बल्कि सभी पार्टियों का कांग्रेस से हैं और इसीलिए सबके निशाने पर कांग्रेस पार्टी ही है फिर वो चाहे भाजपा हो, INLD और BSP का गठबंधन हो या फिर JJP और चद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी का अलायन्स हो. ऐसे में इन सभी कांग्रेस विरोधी पार्टियों और गठबंधनों को कुमारी शैलजा के रूप में एक मुद्दा मिलता हुआ दिखाई दे रहा और सभी लोग उसे भुनाने की कोशिश में लगे हुए हैं. हरियाणा में 22 प्रतिशत दलित वोट है और इतना ही जाट वोट है. जाट वोट में कोई घुसपैठ करने में नाकाम ये पार्टियां अब दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो जाट और दलितों के कॉम्बिनेशन ने कांग्रेस पार्टी को दस में से पांच सीटों पर कामयाबी दिलाई थी और विधानसभा चुनाव में भी कुछ वैसा ही नज़र आ रहा है. जिस तरह से भाजपा उम्मीदवारों का अपने क्षेत्रों में विरोध हो रहा है उससे साफ़ लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी को बहुमत आसानी से मिल जायेगा। हरियाणा में पांच अक्टूबर को वोट पड़ने हैं, पार्टियों के पास दस बारह दिन बचे हैं, मोदी जी एक दौरा लगा चुके हैं और अभी पांच और चुनावी सभाएं उनकी होनी हैं, मायावती भी वहां जाने वाली हैं. जींद में एक बड़ी चुनावी सभा की तैयारी है, भारी भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना मकसद है. लेकिन बड़ा सवाल ये है है कि जींद में शक्ति प्रदर्शन के सहारे वो दलित बैंक में क्या इतनी बड़ी सेंध लगा सकती हैं कि उनका खाता हरियाणा में खुल सके और सहयोगी INLD को कुछ सीटें मिल सकें जो शायद परिस्थितियां आने पर उन्हें किंग मेकर बना सकें। मायावती को भी किंग मेकर बनना बहुत अच्छा लगता है और इसीलिए वो अक्सर एक बात कहती हैं कि सत्ता भले ही न हाथ में हो लेकिन उसकी चाबी उनके हाथ में ही होना चाहिए।

